अपर्णा यादव ने जलाए सपा और कांग्रेस के झंडे, बोलीं- महिला आरक्षण बिल का विरोध करने पर पार्टियां भी होंगी खत्म

लखनऊ में रात के अंधेरे में लाल झंडों के लपटों ने एक political pressure की तस्वीर बना दी। उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने शनिवार आधी रात को BJP workers के साथ मिलकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के झंडे जलाए। इस नाटकीय प्रदर्शन का केंद्र था महिला आरक्षण संशोधन बिल, जो लोकसभा में दो तिहाई बहुमत के अभाव में पारित नहीं हो सका।

अपर्णा यादव ने तीखे शब्दों में कहा कि इस बिल का विरोध करने वाले सभी विपक्षी दल अंततः खत्म हो जाएंगे। उन्होंने कहा, "इन विधर्मियों का झंडा जलेगा और उनकी पार्टियां भी खत्म होंगी।" उन्होंने national identity के साथ जुड़े इस मुद्दे को लेकर विपक्ष पर नारी शक्ति के खिलाफ षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया।

महिला आरक्षण बिल को लेकर बीजेपी की प्रतिक्रिया तुरंत आक्रामक हो गई। पार्टी ने शुक्रवार को ही मकर द्वार पर महिला सांसदों द्वारा कांग्रेस के खिलाफ public protest शुरू कर दिया था। अब यह आंदोलन देशव्यापी होने जा रहा है, जिसमें एनडीए के सहयोगी दल भी शामिल होंगे।

तकनीकी तौर पर, संविधान के 131वें संशोधन बिल को पारित होने के लिए 352 वोट की आवश्यकता थी। लेकिन इसके पक्ष में केवल 298 वोट पड़े, जबकि 230 विपक्ष में। इस तरह बिल critical support से 54 मत पीछे रह गया। बीजेपी इस असफलता को अपने राजनीतिक लाभ में बदलने की कोशिश कर रही है।

इस पूरे घटनाक्रम में एक स्पष्ट political signal छिपा है: महिला आरक्षण को लेकर अब सिर्फ नीतिगत बहस नहीं, बल्कि चुनावी जंग का रूप दे दिया गया है। बीजेपी इसे नारी शक्ति और राष्ट्रीय गौरव के मुद्दे के रूप में पेश कर रही है, जबकि विपक्ष के लिए यह एक tough decision बन गया है।

प्रतिक्रियाएँ 6

  • सच्ची_बात

    झंडा जलाना कोई democratic protest नहीं, बल्कि भावनाओं को भड़काने की कोशिश है।

  • राज_उत्तरप्रदेश

    असली सवाल यह है कि बिल क्यों फेल हुआ? क्या विपक्ष सच में महिलाओं के खिलाफ है या सिर्फ राजनीतिक गणित है?

  • सुधा_मिश्रा

    महिला आरक्षण के मुद्दे पर इतना public attention मिलना अच्छी बात है, लेकिन विधायी स्तर पर बात आगे क्यों नहीं बढ़ रही?

  • मनोज_चौधरी

    अपर्णा यादव का बयान बहुत aggressive tone लिए हुए था। क्या यही अब राजनीति का नया रूप है?

  • प्रज्ञा_एस

    बीजेपी के नारे तो सुनने में अच्छे लगते हैं, लेकिन actual policy पर क्या हुआ? कोई विस्तृत चर्चा नहीं।

  • नीति_विश्लेषक

    बिल के पक्ष में 298 वोट, जरूरत थी 352 के — इसका मतलब है कि major support थी। विपक्ष के अलावा किसने नहीं वोट दिया?

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

[email protected]