कॉपर और चांदी में आने वाली है तूफानी तेजी? अजय केडिया की चेतावनी और निवेश सलाह

शेयर बाजार की चहल-पहल के बीच, एक ऐसी धातु ने धीरे-धीरे अपनी ताकत दिखानी शुरू कर दी है जिसकी ओर अब तक निवेशकों की कम नजर पड़ती थी। अजय केडिया, केडिया एडवाइजरी के निदेशक, का कहना है कि gold के मुकाबले copper और silver में अगले कुछ महीनों में तूफानी तेजी आ सकती है। उनका तर्क है कि ये धातुएं अब 'क्रिटिकल मेटल्स' बन चुकी हैं, जिनकी भूमिका वैश्विक आर्थिक स्थिरता और भविष्य की तकनीकों में बढ़ रही है।

केडिया के अनुसार, market में एक महत्वपूर्ण बदलाव तैयार है — silver-copper ratio में ब्रेकडाउन होने वाला है। इसका अर्थ है कि या तो चांदी कमजोर पड़ेगी और तांबा बढ़ेगा, या फिर तांबा चांदी से कहीं तेज गति से ऊपर जाएगा। अगर घरेलू बाजार में कॉपर ₹1,372 के स्तर को पार करता है, तो आगे ₹1,480 से ₹1,500 का लक्ष्य संभव है।

वैश्विक स्तर पर, लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर कॉपर के लिए बहुत बड़ी तेजी की संभावना है। अगर कीमत 13,500 डॉलर प्रति टन के स्तर को पार करती है, तो यह 14,500-14,600 डॉलर तक जा सकती है। बुल केस में, यह 16,000 डॉलर तक पहुंच सकता है, जो भारतीय करेंसी में लगभग 15 लाख रुपए प्रति टन के बराबर होगा। यह तेजी के पीछे कई कारण हैं: चीन में manufacturing activity में सुधार, AI और डेटा सेंटर्स में कॉपर की बढ़ती industrial demand , और माइनिंग में आ रही चुनौतियां।

एक बड़ी चिंता sulfuric acid के निर्यात पर चीन के संभावित प्रतिबंध से जुड़ी है, जो कॉपर, जिंक और चांदी की खुदाई के लिए जरूरी है। इसकी कमी से supply घट सकती है, जिससे कीमतें स्वतः बढ़ेंगी। साथ ही, कॉपर-गोल्ड अनुपात पिछले 50 साल के निचले स्तर पर है, जो इतिहास के अनुसार तांबे में बड़ी छलांग का संकेत देता है। निवेशकों को risk के बारे में सावधान रहना चाहिए, लेकिन बुलिश outlook रखने वालों के लिए यह समय अहम हो सकता है।

केडिया की सलाह है कि निवेशक सिर्फ सोने तक सीमित न रहें, बल्कि आधुनिक अर्थव्यवस्था की नींव बन रहे बेस मेटल्स पर भी नजर रखें। चांदी भी औद्योगिक उपयोग और सोलर एनर्जी में बढ़ती मांग के चलते आउटपरफॉर्म कर सकती है। लेकिन अंतिम decision लेने से पहले वित्तीय सलाहकारों से परामर्श करना जरूरी है क्योंकि कमोडिटी बाजार में volatility और price risk अधिक होता है।

प्रतिक्रियाएँ 6

  • धनरत्न

    अगर कॉपर ₹15 लाख प्रति टन तक जाता है, तो तारों और इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतें क्या चली जाएंगी? उपभोक्ता पर cost pressure नहीं पड़ेगा?

  • सावधाननिवेशक

    एक्सपर्ट्स हमेशा तेजी की भविष्यवाणी करते हैं। क्या कोई बताएगा कि अगर चीन का आर्थिक डेटा फिर से कमजोर हो गया, तो यह bull run कैसे टिकेगी?

  • मेटलभक्त

    मैंने आज ही MCX पर कॉपर के फ्यूचर्स में छोटा पोजीशन ले लिया। ट्रेडिंग strategy के तहत गिरावट पर खरीदने का प्लान है।

  • तर्कशील

    कॉपर-गोल्ड रेशियो के इतिहास को देखना जरूरी है। लेकिन क्या यह बार बातचीत और असलियत में फर्क नहीं होगा? market sentiment भी तो बदलता रहता है।

  • उमंग

    AI और डेटा सेंटर्स में कॉपर की मांग बढ़ेगी, ये बात common sense है। लेकिन क्या नई तकनीकें इसकी जगह कोई विकल्प नहीं ले सकती?

  • सोनाभक्त

    सोना तो हमेशा सुरक्षित निवेश रहा है। कॉपर को 'नया सोना' कहना थोड़ा ज्यादा है। क्या ये hype सिर्फ मीडिया का खेल नहीं?

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

[email protected]