खरबों डॉलर के बावजूद यूएई को अमेरिका से स्वैप की जरूरत क्यों?
एक ऐसा देश जो दुनिया की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है, जिसके पास government निवेश की 2 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति है, जिसके बैंकों में 1.5 ट्रिलियन डॉलर जमा हैं — फिर भी वह अमेरिका से currency स्वैप की बात कर रहा है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), जिसे कभी वित्तीय तूफानों से दूर माना जाता था, अब एक swap लाइन की तलाश में है। यह बात तब आई है जब ईरान की ओर से उसे attack का सामना करना पड़ा है और हालात अनिश्चित हो गए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह यूएई की मदद करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, "अगर मैं उनकी मदद कर सका तो ज़रूर करूंगा।" इसके पीछे एक राजनयिक समीकरण भी है — यूएई ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में एक ट्रिलियन डॉलर से ज़्यादा का investment किया है। लेकिन असली सवाल यह है: करेंसी स्वैप की ज़रूरत क्यों? क्या यह वास्तविक आर्थिक चिंता है या एक strategic संकेत?
करेंसी स्वैप एक औपचारिक समझौता है जिसमें दो केंद्रीय बैंक अपनी मुद्राओं का temporary लेन-देन करते हैं। यह तब काम आता है जब यूएई के बैंक खुले बाजार से डॉलर नहीं खरीद पाएं। अमेरिकी केंद्रीय बैंक यूएई को डॉलर देगा, और बदले में दिरहम लेगा। बाद में यह लेन-देन उलट दिया जाएगा। यह व्यवस्था विनिमय दर के risk को खत्म करती है। यह कोई ऋण नहीं, बल्कि एक तरलता का बैकअप है।
लेकिन यहां एक बड़ा सवाल तेल बाजार का है। यूएई के अधिकारियों ने अमेरिकी अधिकारियों को बताया कि अगर डॉलर की आपूर्ति रुकी तो वे चीनी currency का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह डॉलर के तेल व्यापार में प्रभुत्व के लिए खतरा है। ब्लूमबर्ग के अर्थशास्त्री ज़ियाद दाऊद कहते हैं कि यह "भरोसे की अपील" है, न कि मदद की याचना। यूएई उस एलीट क्लब में शामिल होना चाहता है जिसमें ब्रिटेन, जापान और यूरोप जैसे देश हैं — जिनके पास अमेरिका के साथ permanent स्वैप लाइनें हैं।
इस पूरे मामले में दो बातें साफ हैं: पहली, कि अर्थव्यवस्था की मजबूती के बावजूद संकट की आशंका से negotiation शुरू होती है। दूसरी, कि अंतरराष्ट्रीय वित्त में अब सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि influence की भी बात होती है। यूएई नहीं चाहता कि उसकी position एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र के रूप में कमजोर हो। और अमेरिका नहीं चाहता कि डॉलर की वैश्विक छवि पर कोई सवाल उठे।
करेंसी स्वैप सिर्फ तरलता के लिए होता है, लेकिन यहां तो भू-राजनीति भी खेल रही है।
यूएई के पास 300 अरब डॉलर के विदेशी भंडार हैं, तो फिर स्वैप की जल्दबाजी क्यों?
अगर डॉलर की जगह यूएई युआन में तेल बेचने लगे, तो यह financial वित्तीय दुनिया में तहलका मचा देगा।
क्या यह स्वैप असली में जरूरी है या सिर्फ signal संकेत देने के लिए?
यूएई ने पाकिस्तान से 3.5 अरब डॉलर वापस लिए हैं, तो लिक्विडिटी में कोई बड़ी कमी नहीं लगती।
यह सिर्फ डॉलर नहीं, बल्कि trust विश्वास की बात है। स्वैप लाइनें विश्वास का प्रतीक हैं।
अगर तेल का व्यापार डॉलर के बजाय दिरहम या युआन में होने लगा, तो पूरी अर्थव्यवस्था डगमगा सकती है।
केंद्रीय बैंकों की स्वैप लाइनें संकट के समय सुरक्षा जाल की तरह काम करती हैं।