इजरायल-लेबनान के बीच 10 दिन का युद्धविराम: राष्ट्रपति ट्रंप ने किया एलान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार देर रात इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिन के युद्धविराम की घोषणा की। यह truce भारतीय समयानुसार तड़के 3.30 बजे लागू हो गया। ट्रंप ने बताया कि लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ व्यक्तिगत बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने इस पर सहमति जताई। ट्रंप ने दावा किया कि यह कदम permanent peace की दिशा में एक बड़ा step forward है।
हालांकि, लेबनान में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है। हिजबुल्ला के वरिष्ठ सांसद हसन फद्लल्ला ने warning दी कि यह ceasefire इजरायल के व्यवहार पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि ईरान के कूटनीतिक प्रयासों के बिना यह समझौता संभव नहीं होता। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने समझौते का welcome करते हुए अमेरिका, फ्रांस और अन्य देशों को धन्यवाद दिया।
इस बीच, युद्ध में भारी नुकसान हुआ है। अब तक 2,196 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 12 लाख से अधिक civilians बेघर हो गए हैं। इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में लिटानी नदी के आखिरी पुल को destroyed कर दिया, जो क्षेत्र को बाकी लेबनान से जोड़ता था। इजरायल ने दावा किया कि हिजबुल्ला के 70 ठिकाने एक मिनट में नष्ट कर दिए गए।
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ भी सख्त naval blockade जारी रखी है। अमेरिकी जनरल डैन केन ने कहा कि जो भी जहाज इस नाकाबंदी को तोड़ेगा, उस पर firing की जा सकती है। अब तक 14 तेल टैंकर वापस मुड़ चुके हैं। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य को reopen की अपील की, कहा कि यह सभी के interest में है।
ट्रंप ने नेतन्याहू और औन को व्हाइट हाउस आमंत्रित किया है ताकि दोनों देश 1983 के बाद पहली बार bilateral talks कर सकें। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया quickly आगे बढ़ सकती है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने तेहरान में ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की और युद्ध समाप्ति के प्रयासों पर चर्चा की। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाह अब इस tension के स्थायी समाधान पर टिकी है।
इतने कम दिनों के ceasefire युद्धविराम से क्या फर्क पड़ेगा? जब तक जमीनी हालात नहीं बदलेंगे, यह सिर्फ एक temporary pause अस्थायी रुकावट है।
ट्रंप ने फिर से दिखाया कि वह बड़े diplomatic moves कूटनीतिक कदम उठा सकते हैं। लेकिन क्या इजरायल वाकई शांति चाहता है? उनकी सेना तो अभी भी हमला जारी रख रही है।
12 लाख बेघर! क्या कोई सोच रहा है इन displaced people विस्थापित लोगों के भविष्य के बारे में? युद्धविराम अच्छा है, लेकिन recovery पुनर्निर्माण कब शुरू होगा?
ईरान की भूमिका यहां अहम है। हिजबुल्ला उनके influence प्रभाव में है। अगर ईरान चाहे, तो यह conflict संघर्ष रुक सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए अमेरिकी blockade नाकाबंदी खतरनाक है। तेल की आपूर्ति रुकी तो पूरी दुनिया में market shock बाजार में झटका लगेगा।
चीन ने अपील की, पाकिस्तान ने बात की, लेकिन असली power ताकत तो अमेरिका और इजरायल के हाथ में है। क्या यह सच में peace शांति है या सिर्फ राजनीतिक दिखावा?