प्रधानमंत्री मोदी को 'मित्र' मैक्रों ने किया फोन, पश्चिम एशिया के हालात और होर्मुज पर क्या हुई चर्चा?
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया, और इस बातचीत में key issue रहा होर्मुज जलडमरूमध्य की security और navigation की आजादी। यह बैठक ऐसे समय हुई जब पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बाद क्षेत्र में शांति की urgency बढ़ गई है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा कि दोनों नेताओं ने peace और stability के लिए सहयोग करने पर agreement जताई।
इस फोन वार्ता से पहले, 19 मार्च को भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई थी, जब वे पश्चिम एशिया में बढ़ते tensions पर चिंता जता चुके थे। उस समय पीएम मोदी ने कहा था कि dialogue और diplomacy के जरिए ही तनाव कम किया जा सकता है। अब दूसरी बार बातचीत करना इस बात का signal देता है कि भारत और फ्रांस क्षेत्रीय crisis के प्रति गंभीर हैं और एक साझा नीतिगत approach विकसित कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने इस बातचीत में होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही की जरूरत पर जोर दिया। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए strategic रूप से महत्वपूर्ण है। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ भी 40 मिनट की लंबी बातचीत हुई, जिसमें भी इसी region की स्थिति और वहां के भू-राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई।
इस तरह की लगातार कूटनीतिक गतिविधियां दिखाती हैं कि भारत विश्व स्तर पर अपनी भूमिका को strengthen कर रहा है। न तो वह किसी एक शिविर में बंध रहा है, न ही तटस्थता के नाम पर निष्क्रिय। बल्कि, वह active तौर पर global issues में शामिल हो रहा है। यह बातचीत न केवल द्विपक्षीय relations को दर्शाती है, बल्कि एक emerging बहुध्रुवीय विश्व में भारत की बढ़ती आवाज को भी।
होर्मुज स्ट्रेट पर निगाह रखना भारत के लिए बहुत जरूरी है। हमारी तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा वहीं से गुजरता है। energy security ऊर्जा सुरक्षा के मामले में यह सीधा असर पड़ता है।
मैक्रों का बार-बार फोन करना दिखाता है कि वे भारत को एक strategic partner रणनीतिक साझेदार मानते हैं। यूरोप भी अब पश्चिम एशिया में भारत की भूमिका को समझ रहा है।
अमेरिका और फ्रांस दोनों से बात करना अच्छा तो है, लेकिन क्या भारत के पास कोई clear policy स्पष्ट नीति है? या बस संतुलन बनाए रखने की कोशिश है?
जब तक तनाव बढ़ेगा, तब तक ऐसी बातचीत जारी रहेगी। लेकिन real impact वास्तविक प्रभाव तभी दिखेगा जब ईरान-अमेरिका वार्ता शुरू करें।
ये सब बातें तो अच्छी हैं, लेकिन क्या इससे आम आदमी की daily life दिनचर्या पर कोई फर्क पड़ेगा? तेल महंगा होगा तो बस बस।
पीएम मोदी ने सही कहा – dialogue संवाद ही एकमात्र रास्ता है। युद्ध या धमकियों से कुछ नहीं मिलता।