MANPADS: 2 किलो बारूद, 8 किमी रेंज.... डेढ़ करोड़ का ईरानी छुटकू बना 930 करोड़ के अमेरिकी F-15 का काल
आसमान में उड़ते अमेरिकी fighter jet अब जमीन पर छिपे एक छोटे हथियार के आगे असहाय नजर आ रहे हैं। मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम, जो महज ₹1.25 करोड़ के हैं, वे 930 करोड़ के F-15 जैसे advanced aircraft को भी निशाना बना रहे हैं। ये shoulder-fired मिसाइलें इंजन की गर्मी को पहचानकर उसका पीछा करती हैं और रडार की पकड़ से बाहर रहकर हमला करती हैं, जिससे उनका detection लगभग असंभव हो जाता है।
ईरान ने अपने indigenous 'मिसाघ' सीरीज के माध्यम से अमेरिकी air superiority को चुनौती दी है। ये मिसाइलें बिना किसी सिग्नल के काम करती हैं, जिसे निष्क्रिय मार्गदर्शन कहा जाता है। इसका अर्थ है कि विमान के warning system को लगभग कोई समय नहीं मिलता। यही कारण है कि कम ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले मिशन अब suicidal बन गए हैं।
इन मिसाइलों में मात्र 2 किलो बारूद होता है और उनकी range 8 किमी तक होती है, लेकिन ये विमान के vulnerable parts को नष्ट करने में पूरी तरह सक्षम हैं। एक अकेला सैनिक इसे कहीं भी ले जा सकता है, जिससे यह mobility का एक जीवंत उदाहरण बन जाता है। एक मिसाइल की कीमत $50,000 से $150,000 के बीच है, जो एक multi-million dollar विमान के मुकाबले अत्यंत cost-effective है।
हालांकि, विमानों के पास countermeasures भी हैं। वे flares छोड़कर मिसाइल को भ्रमित करने की कोशिश करते हैं, जो तेज गर्मी छोड़ते हैं। लेकिन आधुनिक MANPADS अब दो-रंग संवेदकों और imaging technology से लैस हैं, जो असली इंजन और नकली गर्मी में अंतर कर सकते हैं। यही कारण है कि ये मिसाइलें अब भी deadly threat बनी हुई हैं।
इसके अंतरराष्ट्रीय implications भी गहरे हैं। नागरिक passenger planes भी इनके निशाने पर हो सकते हैं, खासकर टेक-ऑफ और लैंडिंग के दौरान। दुनिया भर की governments इन हथियारों के प्रसार से चिंतित हैं, क्योंकि ये आतंकवादियों के हाथों में पहुंच सकते हैं। एक छोटा सा हथियार अब वैश्विक सुरक्षा गतिशीलता को बदल रहा है।
इतना expensive jet महंगा जेट इतनी सस्ती मिसाइल से गिर सकता है? ये तो बजट के हिसाब से बिल्कुल uneven fight असमान युद्ध है।
सरकारें सिर्फ सेना के लिए चिंतित हैं, लेकिन क्या civilian flights नागरिक उड़ानों की सुरक्षा कोई गारंटी है? ये real concern असली चिंता है।
अमेरिका का वही overconfidence अति-आत्मविश्वास, जो उसे सुरक्षित समझता था, अब उसकी biggest weakness सबसे बड़ी कमजोरी बन गया है।
एक अकेला सैनिक, एक कंधे पर मिसाइल… ये असममित युद्ध की पूरी कहानी है। शक्ति का स्थानांतरण स्पष्ट है।
क्या flares फ्लेयर्स अब बेकार हो गए हैं? अगर दो-रंग संवेदक उन्हें पहचान लेते हैं, तो फिर बचाव का last option आखिरी विकल्प क्या है?
इस तकनीक ने साबित कर दिया कि warfare युद्ध अब बस technology तकनीक का नहीं, बल्कि strategy रणनीति का खेल है।