बैट का तांडव, गेंद का अंधेरा: एक ऐसा शनिवार जब 985 रन बन गए
एक ऐसा शनिवार जब सूरज ढलने के साथ ही गेंदबाजों का अंधेरा छा गया। दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम से लेकर जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम तक, cricket का नाम लेकर लोग शायद अब बल्लेबाजों के उस तांडव की बात करेंगे जब 444 गेंदों पर बन गए 985 रन। यह कोई साधारण मैच नहीं था, बल्कि रन के बाढ़ में डूबे गेंदबाजों के लिए एक ब्लैक डे। boundary के बाहर उड़ती गेंदें, छक्कों की झनझनाहट और गेंदबाजों के सिर पकड़े जमीन पर बैठे नजारे ने यह साबित कर दिया कि आज के दौर में कोई भी लक्ष्य safe नहीं।
इस दिन का रूप तो था ही नहीं क्रिकेट का — यह तो बल्लेबाजों का मेला था। दिल्ली में पंजाब किंग्स ने chase हुए दिल्ली कैपिटल्स को धूल चटाई, तो जयपुर में सनराइजर्स हैदराबाद ने राजस्थान रॉयल्स की जीत को लेकर खड़े पैरों पर उठा लिया। दो मैचों में कुल 59 छक्के और 96 चौके, जिसमें दिल्ली में 33 छक्के और जयपुर में 26। pitch तो सपाट थी ही, मैदान का size भी बल्लेबाजों के लिए खुली छूट था। आक्रामकता की यह भाषा टी20 क्रिकेट के नए युग की घोषणा थी।
और फिर वो आँकड़े, जो इतिहास के पन्नों को टटोलने पर मजबूर कर दें। दो शतक — एक कएल राहुल का, जो किसी कविता से कम नहीं था, दूसरा वैभव सूर्यवंशी का, जो तूफान की तरह था। इनके बीच छह explosive अर्धशतकों ने रनों के प्रवाह को कभी थमने नहीं दिया। speed थी लगभग 13.31 रन प्रति ओवर — एक ऐसी तेजी जिसने गेंदबाजों को अपने स्वाभिमान से भी ज्यादा छीन लिया। यह दिन अब रिकॉर्ड बुक्स में सुनामी की तरह दर्ज होगा।
पर इतने रनों के बीच सबसे दिलचस्प था ऑरेंज कैप का 'म्यूजिकल चेयर'। एक ही दिन में चार बार बदला यह कैप — battle एक टोपी का नहीं, बल्कि वर्चस्व के लिए धक्कामुक्की का नाम था। हर नया छक्का, हर नया चौका, हर नया अर्धशतक इस तख्त के लिए एक नई दावेदारी। जब बल्लेबाज जश्न मना रहे थे, गेंदबाज wait कर रहे थे कि उनकी अगली गेंद बाउंड्री से वापस कब आएगी। क्रिकेट ने एक बार फिर साबित किया कि जब बल्ला बोलता है, तो इतिहास खुद-ब-खुद लिख जाता है।
कएल राहुल का शतक तो कविता लगा, बिलकुल poetry काव्य जैसा।
इतने रन पर गेंदबाजी करना मतलब जेल में बिना वकील के मुकदमा लड़ना।
दिल्ली स्टेडियम की पिच तो बल्लेबाजों के लिए buffet बुफे बन गई थी।
985 रन, 59 छक्के, 13.31 रन प्रति ओवर — ये संख्याएँ पागलपन जैसी हैं।
ऑरेंज कैप चार बार बदला? ऐसा लग रहा था जैसे टोपी को डर लग रहा हो।
हैदराबाद ने जीत छीनी, लेकिन राजस्थान के चौके देखकर लगा जैसे fireworks आतिशबाजी चल रही हो।
बल्लेबाजी तो शानदार थी, लेकिन गेंदबाजों के लिए तो यह दिन ब्लैक था।
अगर यही रफ्तार रही, तो अगला लक्ष्य 300 से ऊपर का होगा।