डीडी न्यूज़ के खिलाफ एनएसयूआई का विरोध: राहुल गांधी पर टिप्पणी ने भड़काया संगठन
दिल्ली के मंडी हाउस में डीडी न्यूज़ के दफ्तर के बाहर मंगलवार को protest का माहौल रहा, जब एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने एंकर अशोक श्रीवास्तव की राहुल गांधी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के खिलाफ जमकर pressure बनाया। इस incident में प्रदर्शनकारियों ने एंकर का पुतला भी जलाया, जिसके बाद स्थिति भावनात्मक और तनावपूर्ण हो गई।
प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने property damage पहुंचाया, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने तीन कार्यकर्ताओं — राहुल काजला, अखिलेश यादव और सत्यम कुशवाहा — को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने कार्रवाई को official action बताया और कहा कि वह अन्य suspects की तलाश में है। एनएसयूआई ने इसे democratic protest पर दबाव डालने की कोशिश बताया।
विवाद की जड़ एक हालिया डिबेट में एंकर द्वारा राहुल गांधी के खिलाफ की गई टिप्पणी है, जिसमें उनकी तुलना 'सावरकर की चप्पल की धूल' से की गई थी। छात्र संगठन ने इसे संवैधानिक पद की dignity के खिलाफ और सार्वजनिक प्रसारण के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया। एनएसयूआई राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने मांग की है कि एंकर सार्वजनिक तौर पर apology मांगें और सरकारी मीडिया की accountability सुनिश्चित की जाए।
इस पूरे मामले ने सरकारी प्रसारण संस्थानों की editorial independence पर फिर से बहस छेड़ दी है। विपक्ष का आरोप है कि state media का इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार के लिए किया जा रहा है। वहीं, आलोचक कह रहे हैं कि peaceful protest के नाम पर तोड़फोड़ अस्वीकार्य है और आंदोलन की वैधता को कमजोर करती है।
फिलहाल, मंडी हाउस इलाके में सुरक्षा tightened कर दी गई है। प्रसार भारती के तहत आने वाले डीडी न्यूज़ ने अभी तक इस मामले पर कोई official statement जारी नहीं किया है, जिससे भरोसे को लेकर public trust में कमी की आशंका बढ़ रही है।
तोड़फोड़ होनी चाहिए थी? protest प्रदर्शन तो हर जगह होता है, लेकिन सरकारी संपत्ति को नुकसान देना democratic process लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।
अगर एंकर ने वाकई वैसी टिप्पणी की है, तो उसे apology माफी मांगनी चाहिए। सार्वजनिक मंच पर गैर-जिम्मेदाराना भाषा स्वीकार्य नहीं है।
डीडी न्यूज़ जैसे public broadcaster सार्वजनिक प्रसारक को निष्पक्ष रहना चाहिए। एंकर की टिप्पणी ने credibility विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर दिया है।
हमारे कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पूरी तरह unjust अन्यायपूर्ण है। यह political pressure राजनीतिक दबाव का हिस्सा है।
एक तरफ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, दूसरी तरफ संस्थानों की गरिमा। दोनों के बीच balance संतुलन जरूरी है।
टैक्स देने वालों के पैसे से चलने वाले चैनल पर ऐसी टिप्पणी? यह सिर्फ एक comment टिप्पणी नहीं, बल्कि public insult सार्वजनिक अपमान है।