अमेरिका अपमानित: क्या ईरान के आगे घुटने टेकने के सिवा कोई रास्ता नहीं?
अपमानित होते अमेरिका का चित्र एक ऐसे विश्व शक्ति के लिए नया नहीं, जो ईरान के सामने अपनी strategic पकड़ खोती जा रही है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने सीधे शब्दों में कहा कि वाशिंगटन के पास इस conflict से बाहर निकलने का कोई स्पष्ट path नहीं बचा। उन्होंने कहा, 'अमेरिका ईरान द्वारा अपमानित हो रहा है — खासकर IRGC पूरे अमेरिका को नीचा दिखा रहा है।' यह statement न केवल राजनयिक उथल-पुथल को उजागर करता है, बल्कि अमेरिकी विदेश नीति के फंसाव में आने की भी आशंका जताता है।
मर्ज ने मार्सबर्ग के छात्रों से बातचीत में comparison की कि यह स्थिति अफगानिस्तान और इराक में 20 सालों के military संघर्ष की तरह है — जहां अंदर जाना आसान था, लेकिन बाहर निकलना लगभग असंभव लगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका की current स्थिति ने उसकी रणनीतिक कमजोरी को उजागर कर दिया है। जब तेहरान को बढ़त मिल रही हो, तो बाहर निकलने की राह में diplomatic जाल उलझता जाता है। यही दुविधा अमेरिका को अपने अंतरराष्ट्रीय असर से वंचित कर रही है।
इस बीच, ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए एक नया proposal रखा है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और युद्धविराम की बात शामिल है। लेकिन इसमें nuclear मुद्दे का कोई जिक्र नहीं है। यह चाल ऐसे समय आई है जब ट्रंप प्रशासन pressure बनाने पर आमादा है। ईरान का मकसद साफ है — बातचीत की राह में आ रही obstacle को दूर करना और अंदरूनी असहमति को बाईपास करना। यदि हमले रुकते हैं, तो यूरेनियम एनरिचमेंट पर बातचीत में ट्रंप का प्रभाव समाप्त हो जाएगा।
जर्मनी की चिंता केवल भू-राजनीतिक संतुलन तक सीमित नहीं। मर्ज ने स्पष्ट किया कि यह युद्ध जर्मनी की economy को सीधे प्रभावित कर रहा है। shipping की आवाजाही में बाधा से व्यापार धीमा पड़ रहा है। जर्मनी ने बारूदी सुरंग हटाने वाले मशीन तैनात करने की तैयारी की है, ताकि होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित रखा जा सके। लेकिन सवाल यह है कि जब तक दोनों पक्ष एक-दूसरे पर trust नहीं करेंगे, कोई भी तकनीकी उपाय स्थायी समाधान नहीं ला सकता।
अमेरिका की गिरावट अब राजनयिक मंच पर भी दिख रही है।
ईरान बस अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहा है, लेकिन अमेरिका को 'हार' का डर क्यों सता रहा है?
यहां तो बढ़ता तनाव एक जटिल खेल बन चुका है।
जर्मनी की warning चेतावनी सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि नैतिक भी है।
क्या ट्रंप के लिए यह एक बाहर निकलने की रणनीति का मौका है?
ईरान का नया प्रस्ताव दिखाता है कि वे बातचीत के लिए खुले हैं।
अगर trade व्यापार रुकता रहा, तो यूरोप की अर्थव्यवस्था भी डगमगा जाएगी।
इतिहास दोहराया जा रहा है — फिर एक अधूरा युद्ध, फिर एक अधूरा समाधान।