होर्मुज के ऊपर फोन की घंटी: क्या ट्रंप और ईरान बात करेंगे?
दुनिया की सबसे ज्वलंत tension की लकीरों में से एक — अमेरिका और ईरान के बीच — फिर से उबरने की कोशिश कर रही है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने घोषणा की है कि टेहरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बातचीत के प्रस्ताव पर consideration कर रहा है। लेकिन यह कोई सरल diplomacy नहीं है। ट्रंप का प्रस्ताव तब आया जब उनके दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर की पाकिस्तान यात्रा रद्द हो गई थी, और वाशिंगटन अपने किसी भी objective को हासिल नहीं कर पाया।
ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को बताया कि वे बैठक के लिए किसी को 18 घंटे की यात्रा पर नहीं भेजेंगे। direct फोन पर बातचीत हो सकती है। लेकिन एक सख्त condition भी रखी: ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते। प्रगति की संभावना पर उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बातचीत में शामिल रहेगा — लेकिन वह conversation फोन पर होगी, किसी सम्मेलन में नहीं।
इस बीच, ईरान ने भी एक proposal भेजा है: होर्मुज जलडमरूमध्य खोल दिया जाएगा — provided अमेरिका नाकेबंदी समाप्त कर दे और युद्ध cease हो। तेल और गैस के इस महत्वपूर्ण रास्ते के बंद होने से वैश्विक trade प्रभावित हुआ है। अमेरिका का blockade ईरान को तेल बेचने से रोकने और राजस्व से वंचित करने के उद्देश्य से है।
ईरान ने साफ किया है कि परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत बाद के चरण में होगी। यह strategy दो क्षेत्रीय अधिकारियों ने सोमवार को बताई। लेकिन acceptance की संभावना कम है — खासकर जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था। अब तनाव अनसुलझे हैं, और बातचीत का रास्ता टेढ़ा। मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान आगे आ रहा है, जबकि अराघची रूस की यात्रा पर हैं।
यह सिर्फ एक बातचीत का प्रस्ताव नहीं है — यह दो दुनियाओं के बीच के conflict , power , और survival की लड़ाई का हिस्सा है। होर्मुज का जलडमरूमध्य बंद है, तेल रुका है, और दुनिया सांस रोके बैठी है। फोन की घंटी बजती है, लेकिन कौन उठाएगा — और क्या कहेगा — यही uncertainty इस नाटक की असली भूमिका है।
अगर अमेरिका नाकेबंदी हटाता है तो क्या ईरान वाकई होर्मुज खोल देगा? doubt संदेह है।
ट्रंप का 'फोन करो' वाला बयान तो बस दिखावा है। symbolic प्रतीकात्मक राजनीति।
पाकिस्तान की भूमिका दिलचस्प है। क्या वह वाकई neutral तटस्थ मध्यस्थ हो सकता है?
अमेरिकी नाकेबंदी से ईरान की अर्थव्यवस्था तो डगमगा रही है, लेकिन sanction प्रतिबंध हमेशा काम नहीं करते।
होर्मुज खुला या बंद — असली सवाल तो यह है कि इंसानियत खुलेगी या नहीं।
अगर तेल की आपूर्ति रुकी तो दुनिया भर में मुद्रास्फीति बढ़ेगी।
उम्मीद है कि बातचीत से युद्ध टाला जा सकेगा। शांति ही सबसे बड़ी victory जीत होती है।