अमेरिका से बातचीत के खिलाफ सड़कों पर उतरीं ईरानी महिलाएं! जता रहीं ये मांग

ईरान की राजधानी तेहरान में शुक्रवार को हजारों महिलाएं सड़कों पर उतरीं, जहां rally 'डिवोटेड डॉटर्स ऑफ ईरान' के नाम से आयोजित की गई। इस दौरान participants ने अमेरिका के साथ चल रही बातचीत के खिलाफ अपनी stance स्पष्ट की, और कहा कि अमेरिका पर trust नहीं किया जा सकता। route इमाम हुसैन सेरेमोनियल स्क्वायर से शुरू होकर एंगेलाब स्ट्रीट और वालियासर इंटरसेक्शन तक रहा, जहां पूरे दौरान सुरक्षा बलों ने कड़ी surveillance रखी।

रैली में शामिल कई महिलाओं ने कहा कि पिछले experiences से साफ है कि अमेरिका के साथ वार्ता से ठोस outcomes नहीं निकलते। कुछ ने तो यहां तक कहा कि राष्ट्रीय संप्रभुता और national interests के साथ समझौता नहीं होना चाहिए। इस तरह की sentiment विशेष रूप से उन घटनाओं के बाद तेज हुई है, जब फरवरी में अमेरिका और इजरायल के साथ तनाव बढ़ा था।

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा किया है कि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान के साथ वार्ता हो सकती है। उन्होंने कहा कि युद्ध खत्म करने के लिए एक deal जल्द बन सकता है। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने घोषणा की है कि होर्मुज स्ट्रेट को अगले 10 दिनों के ceasefire के दौरान सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए खोल दिया गया है।

होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक energy supply के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां से दुनिया के कई हिस्सों में तेल की trade आती-जाती है। इसलिए इसके खुले रहने की घोषणा को अंतरराष्ट्रीय markets में सकारात्मक reaction मिली है। यह कदम इजरायल और लेबनान के बीच लड़ाई रोकने के लिए उठाया गया था, जहां ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह इजरायली सेना के सामने थी।

फरवरी में युद्ध की आहट से पहले ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे, लेकिन अब public support सरकार की ओर झुकता दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय unity के नाम पर विरोध की आवाज कुछ हद तक दबी है। अब सवाल यह है कि क्या वार्ता के नाम पर किया जा रहा यह move वास्तव में शांति की ओर जाएगा, या फिर राजनीतिक posturing का हिस्सा है?

प्रतिक्रियाएँ 6

  • शिल्पी_वाराणसी

    अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर इतना skepticism बेवजह नहीं है। पिछले कई सौदों में ईरान को धोखा मिला है।

  • अमिताभ_पंडित

    होर्मुज स्ट्रेट खुलने से तेल की prices पर असर पड़ेगा। भारत जैसे आयातक देशों के लिए यह अच्छी खबर है।

  • रुही_तेहरान

    रैली में महिलाओं की भागीदारी दिखाती है कि वे राष्ट्रीय identity को लेकर गंभीर हैं, न कि सिर्फ विरोध के लिए बाहर आई हैं।

  • विक्रम_जे

    ट्रंप कह रहे हैं कि समझौता होगा, लेकिन वहीं ईरानी महिलाएं कह रही हैं कि नहीं होगा। यह contradiction किसकी जीत दिखाता है?

  • महज़बीन

    सरकार विरोधी आवाजें तब तेज थीं जब युद्ध का खतरा नहीं था। अब जब खतरा है, सब एकजुट दिख रहे हैं। क्या यह genuine एकता है?

  • अनुज_एस

    अमेरिका के लिए भी यह एक delicate स्थिति है। बातचीत करनी है, लेकिन ईरान के अंदर का दबाव भी दिख रहा है।

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

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