शेयर बाजार की उड़ान: विदेशी बिकवाली के बावजूद नहीं टूटा जादू
शेयर बाजार के आसमान छूने के आगे अब विदेशी निवेशकों के डर या बिकवाली भी कुछ खास impact नहीं दिखा पा रहे। इस साल मार्च में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगभग report के अनुसार ₹60,000 करोड़ की बिकवाली की थी, लेकिन बाजार इसके बावजूद ऊपर की ओर बढ़ता रहा। यह एक ऐसा result है जो निवेशक मनोविज्ञान और आंतरिक demand की ताकत को दर्शाता है, जहां बाहरी खतरों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
अप्रैल में यह trend जारी रही। केवल अप्रैल के पहले पखवाड़े में ही वित्तीय सेवा क्षेत्र से ₹19,150 करोड़ की बाहरी निकासी दर्ज की गई। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कौन उस अंतर को पाट रहा है? जवाब है — घरेलू निवेशक। उनका confidence और नए निवेश का flow बाजार को स्थिर रखने में अहम भूमिका निभा रहा है।
इसके पीछे एक major कारण यह भी है कि घरेलू निवेशकों के लिए शेयर बाजार अब बचत का मुख्य tool बन गया है। बैंक ब्याज दरों में गिरावट और सोने की कीमतों में अस्थिरता के बीच, public सीधे शेयर बाजार की ओर रुख कर रहे हैं। यह shift केवल वित्तीय नहीं, बल्कि सामाजिक भी है।
हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि ऐसी growth के साथ risk भी बढ़ता है। विदेशी निवेशकों का पीछे हटना किसी warning के संकेत के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन घरेलू बाजार की मजबूत support और लंबी अवधि के निवेश के plan के कारण, अभी कोई तेज गिरावट देखने को नहीं मिल रही।
FIIs के जाने से डरने की जरूरत नहीं, घरेलू निवेशकों का trust भरोसा बाजार को संभाल रहा है।
मम्मी ने अपनी चूड़ियां बेचकर डीमैट अकाउंट खुलवाया है, अब सब शेयर में पैसा लगा रहे हैं। क्या यह decision फैसला सही है?
बाहरी निकासी ₹19,150 करोड़ है, लेकिन क्या कोई update अद्यतन है कि घरेलू निवेश कितना था?
मैंने SIP शुरू किया है, चाहे बाजार ऊपर जाए या नीचे, लंबी अवधि में result परिणाम अच्छा मिलेगा।
यह सब झूठा भरोसा है, जल्द ही बुलबुला फूटेगा। FIIs ने पहले ही warning चेतावनी दे दी है।
नौकरी छूटने का risk खतरा है, लेकिन फिर भी मैं निवेश जारी रखूंगी। विकल्प क्या है?
बैंक में ब्याज कम, सोना महंगा, अब तो शेयर बाजार ही एकमात्र option विकल्प लग रहा है।