शेयर बाजार की नजर: कच्चे तेल के दाम, Q4 नतीजे और ईरान तनाव पर, क्या जारी रहेगी तेजी?
घरेलू stock market इस सप्ताह कच्चे तेल की prices , कंपनियों के चौथी तिमाही के earnings और अमेरिका-ईरान tensions पर गहरी नजर रखेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ये तीनों कारक बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की appetite पर भू-राजनीतिक घटनाक्रम का सीधा प्रभाव पड़ता है, जिससे market sentiment प्रभावित होता है।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजित मिश्रा ने कहा कि ईरान के साथ तनाव ने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से होने वाली वैश्विक तेल आपूर्ति को लगभग पांचवें हिस्से तक प्रभावित किया है। इससे crude oil की कीमतों में उछाल आ सकता है, जो भारत जैसे आयातक देशों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में निवेशक volatility को लेकर सतर्क रहेंगे।
इस बीच, एचडीएफसी बैंक ने चौथी तिमाही में 8.04 फीसदी की वृद्धि के साथ 20,350.76 करोड़ रुपये का संयुक्त शुद्ध लाभ दर्ज किया। हालांकि, बैंक ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण छोटे व्यवसायों के लिए आगे के जोखिम को लेकर चेतावनी जारी की है। यह outlook निवेशकों के लिए एक key signal है।
स्वस्तिका इनवेस्टमार्ट के संतोष मीणा के अनुसार, आने वाले दिनों में कई बड़ी कंपनियों के quarterly results बाजार की दिशा तय करेंगे। पिछले सप्ताह सेंसेक्स में 1.21 फीसदी और निफ्टी में 1.25 फीसदी की gain दर्ज की गई, जो निवेशकों के confidence को दर्शाती है।
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि निवेशक short-term news के बजाय, अमेरिका-ईरान वार्ता में स्थायी resolution के संकेतों पर अधिक ध्यान देंगे। कच्चे तेल में stability या गिरावट बाजार के लिए सकारात्मक साबित हो सकती है। अगले हफ्ते की दिशा इन्हीं बाहरी और आंतरिक कारकों पर depend करेगी।
इतनी volatility अस्थिरता के बीच SIP जारी रखना ही सही रणनीति है।
क्या बैंकिंग सेक्टर की ताकत वाकई में बाजार को संभाल पाएगी? अभी तो वैश्विक जोखिम बहुत ज्यादा लग रहे हैं।
अमेरिका-ईरान बातचीत में progress प्रगति नहीं दिख रही, और हमारे यहां शेयर चढ़ रहे। क्या यह denial इनकार नहीं है?
एचडीएफसी का profit लाभ तो अच्छा है, लेकिन चेतावनी क्यों? क्या एक्सपोजर ज्यादा है?
कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी dip गिरावट, और तुरंत बाजार में relief राहत। बहुत sensitive संवेदनशील है।
क्या FII की net buying शुद्ध खरीद वाकई में टिकाऊ है? पिछले कुछ महीनों में तो बहुत उतार-चढ़ाव रहा।
तिमाही नतीजे आने वाले हैं, लेकिन क्या कंपनियां guidance भविष्य की रूपरेखा साफ दे पाएंगी? यही असली test परीक्षा है।