MI vs RCB: विराट और रोहित की चोटों ने बढ़ाई टीम इंडिया की चिंता
आईपीएल 2026 के एक उत्तेजक मैच में, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने मुंबई इंडियंस के खिलाफ strong performance के साथ 240 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। इसका केंद्रबिंदु थे विराट कोहली, जिन्होंने महज 38 गेंदों पर half-century जड़कर फैंस को उत्साहित किया। लेकिन इसी उत्साह के बीच एक चिंताजनक संकेत आया — कोहली फील्डिंग के लिए fielding में नहीं उतरे।
मैच के दौरान सामने आया कि विराट के एंकल में injury concern है। वे बल्लेबाजी के दौरान तो फिट लग रहे थे, लेकिन गेंदबाजी के समय ड्रेसिंग रूम में बैठे नजर आए। यह स्थिति टीम इंडिया के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि आईपीएल के तुरंत बाद भारत को अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज खेलनी है, और अगले साल वनडे वर्ल्ड कप भी है। दोनों घटनाओं में fitness और फॉर्म निर्णायक भूमिका निभाएगी।
मुंबई इंडियंस की पारी की शुरुआत रोहित शर्मा ने आक्रामक अंदाज में की। छठे ओवर तक वह 13 गेंदों पर 19 रन बना चुके थे और एक बेहतरीन छक्का भी जड़ चुके थे। लेकिन रसिक सलाम की गेंद पर शॉट खेलने के बाद वे हैमस्ट्रिंग में तनाव के कारण लड़खड़ा गए। फिजियो के आने के बावजूद वे आगे नहीं खेल सके और retired hurt होकर पवेलियन लौट गए।
इस तरह, एक ही मैच में दोनों टीम इंडिया के सीनियर बल्लेबाजों का चोटिल होकर बाहर होना टूर्नामेंट में एक major concern बन गया है। आईपीएल के उच्च दबाव वाले मैचों में खिलाड़ियों पर physical pressure बढ़ रहा है, और टीम मैनेजमेंट के लिए यह जोखिम अब और भी स्पष्ट हो गया है। फैंस के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि क्या आईपीएल के कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय अभियानों के लिए long-term impact डाल रहे हैं।
विराट का अर्धशतक तो बेहतरीन था, लेकिन फील्डिंग से बाहर होना बड़ा लाल झंडा है। वर्ल्ड कप के लिहाज से ये चोटें बहुत कीमती पड़ सकती हैं।
रोहित का रिटायर्ड हर्ट होना वाकई tough moment मुश्किल पल था। पहले ओवर में छक्का देखकर लगा था कि आज बड़ी पारी होगी।
आईपीएल में तो सभी खिलाड़ी अपनी हद तक जा रहे हैं। लेकिन टीम इंडिया के लिए long-term planning लंबी अवधि की योजना कहाँ है? इस तरह की चोटें बार-बार क्यों आ रही हैं?
विराट और रोहित दोनों के लिए आईपीएल में high intensity उच्च तीव्रता बहुत ज्यादा पड़ रही है। उम्र के साथ शरीर कम झेल पा रहा।
एक मैच में दो स्टार खिलाड़ी चोटिल? ये सिर्फ bad luck बुरी किस्मत नहीं है। ये टूर्नामेंट सिस्टम की कमजोरी दिखा रहा है।
क्या BCCI और IPL टीम्स वाकई player workload खिलाड़ी के कामकाज पर ध्यान दे रहे हैं? या सिर्फ रन और रुपये की बात चल रही है?