अंतरिक्ष में दिखा टूटता तारा, सामने आई खूबसूरत तस्वीर, NASA एस्ट्रोनॉट ने कर दिया कमाल
अंतरिक्ष में एक दुर्लभ और खूबसूरत दृश्य कैमरे में कैद हुआ है: एक टूटता हुआ तारा, जिसे पृथ्वी पर लोग आकाश में उल्का के रूप में देखते हैं। नासा की अंतरिक्ष यात्री जेसिका मीर ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से इस rare event की एक शानदार तस्वीर साझा की है। इस तस्वीर में एक उल्का आकाश में लकीर छोड़ते हुए दिखाई दे रही है, जबकि पृथ्वी के किनारे पर शहरों की रोशनी धुंधली लकीरों की तरह चमक रही है।
जेसिका ने बताया कि उन्होंने यह तस्वीर स्पेस स्टेशन के cupola , यानी खिड़कियों वाले डॉम जैसे हिस्से से ली। वे उस समय निगरानी कर रही थीं और सही timing पर कैमरे को तैयार करने में सफल रहीं। उन्होंने कहा कि यह opportunity पाकर वे बहुत fortunate महसूस कर रही थीं। पृथ्वी से उल्काओं को देखने के बजाय अंतरिक्ष से उनका नजारा बिल्कुल अलग है — यहां ग्रह का वायुमंडल और अंधेरा एक अनूठी पृष्ठभूमि बनाता है।
तस्वीर को three-second exposure के साथ क्लिक किया गया था, जिसकी वजह से शहरों की रोशनी लंबी चमकदार लकीरों में बदल गई। बाईं ओर उल्का की एक स्पष्ट लकीर दिखाई देती है, जो वास्तव में एक छोटा अंतरिक्ष पत्थर है जो तेजी से पृथ्वी के atmosphere में प्रवेश कर रहा है और घर्षण के कारण जल रहा है। यह घटना लिरिड उल्कावृष्टि का हिस्सा है, जो हर साल अप्रैल में होती है।
लिरिड उल्कावृष्टि का नामकरण लाइरा नक्षत्र के नाम पर हुआ है, जहां से उल्काएं आती हुई प्रतीत होती हैं। यह उत्तरी गोलार्ध में सबसे अच्छी तरह देखी जा सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल यह घटना 21 और 22 अप्रैल के बीच अपने चरम पर रहेगी। जेसिका ने सामान्य लोगों से अपील की है कि वे रात में आसमान की ओर देखें। अगर किस्मत साथ दे, तो अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को भी आसमान में चमकते हुए देखा जा सकता है।
अंतरिक्ष से यह नजारा देखकर लगता है कि पृथ्वी कितनी छोटी और नाजुक है। perspective नजरिया बदल जाता है।
लिरिड मेटियर शॉवर हर साल होता है लेकिन इतनी स्पष्ट तस्वीर शायद पहली बार देखी है। clarity स्पष्टता अद्भुत है।
थ्री-सेकंड एक्सपोजर का इस्तेमाल बहुत समझदारी वाला था। exposure एक्सपोजर के बिना यह लकीरें नहीं दिखतीं।
हमेशा सोचा था उल्का बहुत ऊपर जलता है, लेकिन अब पता चला कि यह वायुमंडल के lower layer निचले परत में ही जल जाता है।
कल रात मैंने भी एक टूटता तारा देखा था। काश मैंने कैमरा निकाल लिया होता। missed opportunity चूका हुआ मौका।
जेसिका मीर ने न सिर्फ तस्वीर ली, बल्कि उसके पीछे का विज्ञान भी समझाया। public awareness जागरूकता बढ़ाने का बेहतरीन तरीका।
अंतरिक्ष यात्री होने का फायदा ही कुछ और है। हम पृथ्वी पर बैठे घंटों उल्का ढूंढते रहते हैं, वो खिड़की से ही direct view सीधा नजारा देख लेते हैं।
क्या इस तरह की तस्वीरों से उल्काओं के trajectory प्रक्षेपवक्र का अध्ययन हो सकता है? या यह सिर्फ दृश्य सौंदर्य है?