जंग में रूस, चीन और उत्तर कोरिया ने कैसे की ईरान की मदद? जानकर अमेरिका रह गया हैरान

इजरायल और अमेरिका को दुनिया की सबसे ताकतवर सैन्य शक्तियों में गिना जाता है, फिर भी ईरान की मिसाइलें destruction मचाने में कामयाब रही हैं। पश्चिम एशिया में कुछ दिनों पहले शुरू हुआ संघर्षविराम अब किसी भी पल टूट सकता है। ऐसे में एक बड़ा question उठता है: ईरान के पास आखिर क्या है, जो अमेरिका और इजरायल की नाक में दम कर दे? एमआईटी के नामचीन परमाणु विशेषज्ञ प्रोफेसर टेड पोस्टल ने ईरान की घातक मिसाइलों और सटीक ड्रोन हमलों के पीछे की तकनीकी रणनीति सामने रखी है।

प्रो. पोस्टल का कहना है कि ईरान की गाइडेंस तकनीक अद्वितीय है, क्योंकि वे युद्ध में satellite system का इस्तेमाल कर रहे हैं — लेकिन अमेरिकी GPS की जगह चीन के बाइडू नेविगेशन सिस्टम का। बाइडू को जाम करना मुश्किल है और इसकी accuracy बेहद ऊंची है। मार्च में शुरू हुई लड़ाई के पहले 10 दिनों में ही साफ हो गया कि पिछले कुछ महीनों में ईरान ने अपनी मिसाइल तकनीक में बड़ा change किया है। पिछले संघर्ष की तुलना में वह इस बार कहीं ज्यादा प्रभावी दिखा।

ईरान की नई मिसाइलों में R27 नामक रॉकेट मोटर का इस्तेमाल हो रहा है। यह मोटर वॉरहेड के पीछे लगी होती है, जिससे मिसाइल धीमी नहीं होती और 3 किमी प्रति सेकेंड की रफ्तार से target को भेद देती है। प्रोफेसर के अनुसार, इजरायल के मिसाइल defense सिस्टम की सफलता का दावा झूठा है। बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने की दर 5 प्रतिशत से भी कम रही है।

एक और बड़ा मोड़ तब आया जब ईरान ने हिंद महासागर में अमेरिकी अड्डा डिएगो गार्सिया की ओर खुर्रमशहर-4 मिसाइल दागी। प्रो. पोस्टल ने खुलासा किया कि यह मिसाइल मूल रूप से रूसी है, जिसे उत्तर कोरिया ने समझदारी से अपग्रेड किया। फिर ईरान ने भी इसमें नई तकनीक जोड़ी। महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें चार की जगह सिर्फ दो मोटरें लगाई गई थीं, जिससे वजन कम हुआ और उड़ान दूरी बढ़ गई।

अमेरिका का GPS सिस्टम 24 उपग्रहों पर निर्भर है, जबकि चीन का बाइडू 45 उपग्रहों का उपयोग करता है। यह तकनीकी बदलाव न केवल ईरान की मिसाइलों को जाम से बचाता है, बल्कि इसके जरिए अमेरिका के वैश्विक control को चुनौती भी मिल रही है। यह युद्ध केवल सैन्य नहीं, बल्कि तकनीकी और भू-राजनीतिक power का भी प्रतिबिंब है।

प्रतिक्रियाएँ 6

  • राजीव_23

    अमेरिका को चीनी तकनीक से challenge मिल रही है, यह बात तो साफ है।

  • सुधा_मिश्रा

    अब समझ आया कि कैसे ईरान इतनी दूर तक हमला कर पाया। बाइडू सिस्टम का role अहम है।

  • विकास_जी

    अगर इजरायल का डिफेंस सिस्टम फेल है, तो उनकी security पर गंभीर सवाल उठते हैं।

  • नीरज_पांडे

    उत्तर कोरिया और रूस की मिसाइल तकनीक का ईरान में एकीकरण खतरनाक है। यह alliance पूरे क्षेत्र के लिए खतरा है।

  • अर्पिता_एम

    चीन के 45 उपग्रहों के साथ बाइडू सिस्टम वाकई में GPS से आगे निकल सकता है। accuracy और reliability दोनों में।

  • अमित_एस

    क्या यह युद्ध अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि एक नए वैश्विक हथियार दौड़ की शुरुआत है?

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

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