दक्षिण दिनाजपुर चुनाव: 78 हजार मतदाता हटे, किसकी नैया पार लगेगी?

दक्षिण दिनाजपुर के गांव-शहर इस बार election की तपती धूप में तप रहे हैं, जहां voter list की पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) ने 78 हजार नाम हटा दिए हैं। यह impact न सिर्फ तृणमूल और भाजपा दोनों के लिए चुनौती है, बल्कि यह तय करेगा कि किसकी नैया sails से पार लगेगी और कौन मझधार में फंस जाएगा। इस क्षेत्र का इतिहास peasant movement से जुड़ा है, और आज भी जनता की आवाज राजनीतिक decision पर गहरा असर डालती है।

छह विधानसभा सीटों वाले इस जिले में तृणमूल ने पिछले चुनाव में 72 लाख से अधिक वोट लेकर भी केवल तीन सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा ने शेष तीन पर claim जमाया था। SIR के बाद हटाए गए illegal voter का आंकड़ा तृणमूल के लिए खासा चिंताजनक है, जो इस मुद्दे पर जोरदार reaction दे रही है। ऐसा लगता है कि pressure उसी पर है, जिसने अधिक नाम जोड़े थे।

बांग्लादेश से लगे इस क्षेत्र में nationalism का मुद्दा गहराई से बोलता है। भाजपा aggressive ढंग से बूथ स्तर तक इस भावना का उपयोग कर रही है, खासकर बांग्लादेशी हिंदुओं की स्थिति को लेकर। तपन विधानसभा जैसी सीट पर जहां भाजपा की जीत का अंतर महज 1650 वोट का था, वहां यह margin अब और भी नाजुक हो सकता है।

इस बीच, अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में ओवैसी की एआइएमआइएम की मौजूदगी से political equation और जटिल हो गए हैं। बिहार के सीमांचल में लगातार सफलता के बाद उनकी नजर यहां भी है। अगर वे minority voter का trust जीतते हैं, तो तृणमूल को नुकसान और भाजपा को फायदा हो सकता है। वाम दलों की छटपटाहट दिख रही है, लेकिन वे public support वापस पाने में असमर्थ लगते हैं।

स्थानीय स्तर पर, development और employment के मुद्दे भी तेजी से उभर रहे हैं। बालूरघाट के मोबाइल दुकानदार विक्रांत राय कहते हैं कि यहां की infrastructure में कमी है। दुर्गा पूजा क्लब के सदस्य विप्लव के अनुसार, सरकारी financial support बढ़ी है, लेकिन किसानों का कहना है कि बेरोजगारी अभी भी एक बड़ा concern का विषय है। राजनीति सिर्फ धर्म और विकास नहीं, बल्कि आम आदमी की daily struggle पर भी टिकी है।

प्रतिक्रियाएँ 6

  • संदीप_दिनाजपुर

    78 हजार नाम हटे हैं तो cost किसकी बढ़ेगी? तृणमूल को लगेगा झटका, लेकिन क्या भाजपा के लिए यह opportunity है या फंदा?

  • ममता_घोष

    यहां के लोगों को न तो religious politics चाहिए, न ही झूठे promise । बस रोजगार और स्कूल-अस्पताल चाहिए।

  • गंगाराम_वासी

    SIR पर इतना शोर क्यों? अगर illegal voter हटे हैं तो यह तो fair process है। लेकिन क्या इससे असली मुद्दे धुंधले नहीं हो रहे?

  • खान_पान

    सीमांचल और दक्षिण दिनाजपुर का खान-पहनावा एक जैसा है। ओवैसी का फैलाव तो समझ आता है, लेकिन क्या वह real issue से ध्यान भटकाएगा?

  • हरिराम_किसान

    हमारे बच्चे खेती छोड़कर कहां जाएंगे? no job है, सरकार सिर्फ घोषणाएं करती है। daily struggle कौन लड़ेगा?

  • पश्चिम_की_राय

    भाजपा के दावे बड़े हैं, लेकिन क्या development यहां तक पहुंचा है? public trust तभी बनेगा जब वादों पर action होगी।

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

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