नीतीश कुमार के जाने के बाद भी क्यों रहेगी उनकी चर्चा?

नीतीश कुमार आज मुख्यमंत्री के पद से स्वेच्छा से संन्यास ले रहे हैं, लेकिन उनके निर्णयों की public impact अभी भी महसूस की जा रही है। 2005 में बिहार को कानून व्यवस्था के बिगड़े हालात से उबारने के लिए उन्होंने zero tolerance की नीति लागू की। अपहरण, बाहुबल और भ्रष्टाचार के खिलाफ strict action ने आम लोगों को सुरक्षा का एहसास दिलाया। फास्ट-ट्रैक अदालतों ने speedy trial को संभव बनाया, जिससे अपराध दर में गिरावट आई। यह उनका सबसे सशक्त policy decision था, जिसने 'जंगल राज' की छवि बदली।

2016 में उन्होंने strict prohibition कानून लागू किया, जो आज भी देश के अन्य राज्यों में चर्चा का विषय है। विशेषज्ञों ने सलाह दी थी कि शराब से घरेलू domestic violence और आर्थिक संकट बढ़ता है। इसके बावजूद विरोध के बावजूद, नीतीश ने political pressure को झेला और कानून को uphold । 10 साल बाद ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू हिंसा और शराब से जुड़े अपराधों में कमी आई। यह न केवल एक bold move , बल्कि महिलाओं के अधिकारों के प्रति उनकी दृढ़ता का प्रतीक भी है।

नीतीश कुमार महिला empowerment के लिए भी याद किए जाएंगे। 2006 में, जब केंद्र 33% आरक्षण के लिए संघर्ष कर रहा था, तब उन्होंने पंचायत और नगर निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण लागू कर दिया। सरकारी नौकरियों में 35% आरक्षण और self-employment के लिए 2.75 करोड़ जीविका दीदी समूहों का गठन उनकी दूरदर्शिता को दर्शाता है। free bicycle ने लड़कियों की शिक्षा में भागीदारी दोगुनी कर दी, जो एक स्थायी social change की ओर पहला कदम था।

उनके शासन में infrastructure पर भारी ध्यान दिया गया। जहां पहले सड़कें गड्ढों में या गड्ढे सड़कों में खो जाते थे, वहां आज गांव-गांव तक पक्के रास्ते पहुंच चुके हैं। गंगा पर बने विशाल bridges , 24 घंटे बिजली, tap water , और पक्की गलियां उनकी स्पष्ट development policy के उदाहरण हैं। कांग्रेस नेता शशि थरूर जैसे विपक्षी ने भी इसकी सराहना की। यह visible progress जनता को भरोसा दिलाती है।

उनकी नीति की रीढ़ थी '7 निश्चय' कार्यक्रम, जिसे उन्होंने तीन बार अपडेट किया। इसके तहत युवाओं के लिए 10 लाख सरकारी नौकरियां और agriculture को बढ़ावा देने वाली योजनाएं शामिल हैं। इस्तीफे के एक दिन पहले भी वे किसी योजना का inspection करने पहुंच गए — यह उनकी प्रतिबद्धता का स्पष्ट संकेत है। नीतीश कुमार के जाने के बाद भी उनके policy legacy की चर्चा तब तक रहेगी, जब तक बिहार के लोग इन बदलावों को महसूस करते रहेंगे।

टिप्पणियाँ 6

  • राजीव_पटना

    शराबबंदी से राजस्व का नुकसान तो हुआ, लेकिन long-term benefit अब सामने है। गांवों में पुरुष कम झगड़ते हैं।

  • सुधा_मिथिला

    महिलाओं को 50% आरक्षण देने वाले वे पहले मुख्यमंत्री थे। आज की political rhetoric में ऐसी दूरदर्शिता कहां?

  • अर्जुन_डीजे

    साइकिल योजना ने मेरी बहन को स्कूल जाने में मदद की। आज वह पढ़-लिखकर बैंक में नौकरी करती है। small decision , बड़ा असर।

  • विनोद_जेडीयू

    नीतीश जी के बिना पार्टी की future direction अनिश्चित है। क्या युवा नेता इतनी जिम्मेदारी संभाल पाएंगे?

  • प्रियंका_बीएचयू

    जंगल राज के बाद कानून का राज लाना आसान नहीं था। उन्होंने संरचनात्मक सुधार में विश्वास किया, न कि सिर्फ वादों में।

  • मुकेश_मुजफ्फर

    इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्चे को कई बार बर्बादी कहा गया, लेकिन आज हर घर बिजली और पानी की practical impact साफ है।