बुरी तरह नाराज पाकिस्तान, ब्लेसिंग मुजरबानी के बाद राजस्थान रॉयल्स के खिलाड़ी पर लगाया बैन
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने राजस्थान रॉयल्स के खिलाड़ी दासुन शनाका पर एक साल का प्रतिबंध लगा दिया है, जिसके बाद वे PSL 2026 में लाहौर कलंदर्स के लिए नहीं खेल पाएंगे। यह कार्रवाई ब्लेसिंग मुजरबानी के मामले के तुरंत बाद आई है, जिससे संकेत मिलता है कि PCB integrity के मुद्दे पर अब कड़ी रुख अपना रहा है।
PCB के अनुसार, शनाका ने player registration के नियमों और त्रिपक्षीय agreement का उल्लंघन किया है। श्रीलंकाई ऑलराउंडर ने PSL सत्र शुरू होने से पहले ही IPL फ्रेंचाइजी राजस्थान रॉयल्स को जॉइन कर लिया, जो contractual terms के खिलाफ था। बोर्ड का कहना है कि नाम वापस लेना acceptable grounds के तहत नहीं आता।
यह फैसला राजस्थान रॉयल्स के लिए भी एक strategic blow है, क्योंकि उन्होंने शनाका को सैम कर्रन के injury replacement शामिल किया था। हालाँकि, IPL ने अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। PCB का दावा है कि यह कार्रवाई league's credibility को बनाए रखने के लिए जरूरी थी।
इससे पहले, ब्लेसिंग मुजरबानी पर भी दो साल का प्रतिबंध लगाया गया था, जब वे इस्लामाबाद यूनाइटेड को छोड़कर KKR में शामिल हो गए। उनकी एजेंसी ने कहा कि कोई औपचारिक contract नहीं हुआ था, बस सोशल मीडिया पर announcement की गई थी। फिर भी PCB ने उन्हें disciplinary action से नहीं बख्शा।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या PCB वास्तव में fair enforcement कर रहा है, या सिर्फ दिखावे के लिए कड़े फैसले ले रहा है। वैश्विक फ्रेंचाइजी लीग्स के बीच खिलाड़ियों की भरमार है, और ऐसे मामले increasingly common दिख रहे हैं। अगले कुछ महीनों में IPL और PSL के बीच तनाव और competitive pressure बढ़ सकता है।
PCB ने मुजरबानी पर भी बैन लगाया था, लेकिन अब शनाका पर भी? क्या ये सच में fair play निष्पक्ष खेल की बात कर रहे हैं या सिर्फ दिखावा?
लाहौर कलंदर्स के लिए बड़ा नुकसान है। शनाका एक match-winner मैच जीताने वाला खिलाड़ी था।
IPL हमेशा के लिए नहीं चलेगा, लेकिन अब तो ये player market खिलाड़ी बाजार ही पागल हो गया है।
PCB को enforce rules नियम लागू करने चाहिए, वरना कोई भी लीग गंभीरता से नहीं लेगा।
देखो, जब तक financial incentive वित्तीय प्रोत्साहन इतना ज्यादा होगा, खिलाड़ी छोटी लीग छोड़कर बड़ी लीग में जाएंगे।
असली सवाल ये है कि क्या त्रिपक्षीय समझौता वाकई में था? कोई साबूत कहाँ है?
हमारे लिए तो ये अच्छा हुआ, कम से कम शनाका तो हमारे साथ है। silver lining चांदी का एक छोर मिल गया।
PCB को due process उचित प्रक्रिया के तहत फैसला लेना चाहिए था, न कि सिर्फ रिएक्ट करना।