पृथ्वी पर पानी कहां से आया (लेखक- संजय गोस्वामी / ईएमएस)
पृथ्वी पर पानी कहां से आया, यह सवाल अब तक वैज्ञानिकों के लिए एक big रहस्य बना हुआ था। लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि हमारे ग्रह पर पानी की आपूर्ति comets के कारण हुई, जो सौरमंडल के ठंडे किनारों से आए। लेकिन अब एक नई discovery ने इस धारणा को चुनौती दी है। यूरोपियन स्पेस एजेंसी के रोजेटा अंतरिक्षयान द्वारा एकत्रित आंकड़ों के विश्लेषण के बाद वैज्ञानिकों का मानना है कि पानी असल में asteroids के जरिए पहुंचा होगा।
रोजेटा ने धूमकेतु 67पी की बर्फ की रासायनिक संरचना का अध्ययन किया, और वहां पाए गए "भारी पानी" (ड्यूटेरियम सहित) का अनुपात पृथ्वी के समुद्रों में मौजूद पानी से मेल नहीं खाता। यह अंतर बहुत महत्वपूर्ण है। इसका मतलब है कि धूमकेतु शायद पृथ्वी के पानी के प्राथमिक स्रोत नहीं थे। इसके बजाय, क्षुद्रग्रहों की रचना और बर्फ की रासायनिक विशेषताएं ज्यादा मेल खाती हैं।
एक और surprising खुलासा यह है कि पृथ्वी का कम से कम 30 से 50 प्रतिशत पानी सौरमंडल के निर्माण से भी पुराना हो सकता है। मिशिगन विश्वविद्यालय के शोधकर्ता इल्स क्लीव्स के अनुसार, यह पानी अंतरतारकीय बादलों में chemical reactions द्वारा तारे के जन्म से पहले ही बन चुका था। यानी हमारे सौरमंडल के गठन से लगभग एक लाख साल पहले यह पानी अस्तित्व में आ गया था।
वैज्ञानिकों ने simulations के जरिए यह जांचा कि यदि पानी सौर निहारिका में ही बना होता, तो उसका ड्यूटेरियम अनुपात कैसा होता। नतीजा साफ था: वहां की प्रक्रियाएं इतना भारी पानी produce नहीं कर सकती थीं। इसलिए, यह पानी हमारे सौरमंडल का "उत्पाद" नहीं, बल्कि एक "विरासत" है।
यह finding सिर्फ पृथ्वी के इतिहास को समझने तक ही सीमित नहीं है। यह बताती है कि पानी ब्रह्मांड में एक सामान्य और जल्दी बनने वाला तत्व हो सकता है। इसका अर्थ है कि जीवन के लिए आवश्यक द्रव्य शायद अन्य तारकीय प्रणालियों में भी आम हों। क्लीव्स कहती हैं कि यह निष्कर्ष "बहुत रोमांचक" है, क्योंकि यह जीवन की संभावना के बारे में हमारी समझ को गहरा करता है।
अगर पानी तारे बनने से पहले बन गया, तो क्या इसका मतलब है कि हर नए सिस्टम में पानी अपने आप मिल जाएगा? implication इसका तात्पर्य तो बहुत बड़ा है।
यानी हमारे समुद्र की बर्फ असल में बाहरी अंतरिक्ष की देन है? वाह, ये सोचकर दिमाग घूम जाता है। mind-blowing दिमाग घूम जाना बिल्कुल सही शब्द है।
धूमकेतु से क्षुद्रग्रह तक... वैज्ञानिकों की राय बदलती रहती है। लेकिन क्या ये evidence सबूत पर्याप्त हैं? अभी भी तो अनुमान ही है।
क्या क्षुद्रग्रह आज भी पानी लाते रहते हैं? या ये सिर्फ शुरुआती दौर की बात है? current मौजूदा समय में क्या कोई भूमिका है?
लेखक हूं। खुशी है कि लेख पसंद आया। स्पष्टीकरण के लिए: यह प्रक्रिया 4 अरब साल पहले की है। आज के क्षुद्रग्रह impact टक्कर तो मारते हैं, लेकिन पानी पहुंचाने के मामले में नगण्य हैं।
रोजेटा मिशन असल में क्रांतिकारी था। ये data आंकड़े बिना उसके संभव नहीं थे। स्पेस एजेंसियों को ऐसे मिशन जारी रखने चाहिए।
हमारे शरीर में भी तो पानी है। क्या इसका मतलब है कि हमारी उत्पत्ति भी अंतरिक्ष से हुई? literally शाब्दिक अर्थ में तो नहीं, लेकिन तत्व तो वहीं से आए।