गांव से ग्लोबल तक ‘आयुषवे’ का सफर: आरा का हेल्थ स्टार्टअप बना देशभर में मिसाल
भोजपुर के छोटे से गांव धनडीहां से शुरू हुआ एक स्वास्थ्य mission आज पूरे देश में फैल चुका है। डॉ. पी. पुष्कर ने natural medicine और स्व-रोजगार के लक्ष्य से 2009 में 'आयुषवे' की स्थापना की। उनका मानना था कि हर व्यक्ति घर पर रहकर भी स्वस्थ जीवन जी सकता है, बस उसे self-healing का ज्ञान मिलना चाहिए।
अब तक free training के जरिए 45,000 से अधिक लोगों को पर्सनल हेल्थ कोच बनाया जा चुका है। ये लोग अब अपने समुदाय में आहार, डिटॉक्स थैरेपी और प्राकृतिक उपचार के बारे में जागरूकता फैला रहे हैं। इससे न सिर्फ healthcare access ग्रामीण इलाकों तक पहुंची हैं, बल्कि लोगों के लिए self-employment का रास्ता भी खुला है।
कोविड-19 के लॉकडाउन के दौरान भी यह मिशन नहीं रुका। ऑनलाइन माध्यम से 2,000 से अधिक health professionals को प्रशिक्षित किया गया। डॉ. पुष्कर का मानना है कि महामारी ने सिर्फ महत्व बढ़ाया कि कैसे घर पर रहकर भी स्वास्थ्य प्रबंधन संभव है। इस अवधि में डिजिटल तकनीक ने mission को नई ऊर्जा दी।
आज 'आयुषवे' startup Startup India और Startup Bihar द्वारा चयनित है। डॉ. पुष्कर ने मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु जैसे शहरों में कार्यशालाएं आयोजित कर आयुष चिकित्सा को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है। जुलाई 2026 में पटना में आयुष्वे महाकुंभ का आयोजन होगा, जिसमें पूरे देश के विशेषज्ञ शामिल होंगे।
उनका लक्ष्य स्पष्ट है: हर घर तक स्वास्थ्य। डॉ. पुष्कर कहते हैं कि जब तक एक भी व्यक्ति स्व-चिकित्सा के बारे में नहीं जानता, तब तक उनका goal पूरा नहीं हुआ। यह सिर्फ एक स्टार्टअप नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन है जो देश के स्वास्थ्य landscape को बदल रहा है।
45 हजार लोगों को प्रशिक्षित करना बहुत बड़ी उपलब्धि है। गांव से शुरू हुई इस initiative पहल ने देखते-देखते राष्ट्रीय स्तर पकड़ लिया।
लॉकडाउन में भी काम जारी रखना दिखाता है कि यह सिर्फ business व्यवसाय नहीं, बल्कि एक सच्चा समाज सेवा अभियान है।
सवाल ये है कि क्या इन प्रशिक्षित कोचों को वास्तविक medical support चिकित्सा सहायता मिलती है? प्राकृतिक चिकित्सा अच्छी है, लेकिन गंभीर मामलों में डॉक्टर जरूरी है।
मैंने भी इसकी ऑनलाइन क्लास में भाग लिया था। diet आहार और detox therapy डिटॉक्स थैरेपी के बारे में बहुत कुछ सीखा। ये ज्ञान हर किसी को मिलना चाहिए।
आयुष्वे महाकुंभ के बारे में सुनकर उत्साहित हूं। ऐसे events आयोजन पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक दुनिया में लाने में मदद करते हैं।
ये बताओ कि क्या इन कोचों को कहीं नौकरी या recognition मान्यता मिल रही है? बस प्रशिक्षण देना काफी नहीं है।