Paracetamol Pregnancy Risks: क्या प्रेग्नेंसी में पैरासीटामॉल खाने से बच्चे में ऑटिज्म होता है? स्टडी में सामने आया सच
गर्भावस्था के दौरान दवा लेने को लेकर महिलाओं के मन में हमेशा एक public concern रहती है। खासकर जब बात बुखार या दर्द की हो, तो यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि दवा सुरक्षित है या नहीं। कुछ समय से एक widespread claim चल रहा था कि पैरासीटामॉल के सेवन से बच्चे में autism risk बढ़ सकता है। इस डर ने दुनिया भर में माताओं को परेशान किया, लेकिन अब एक विश्वसनीय शोध ने इस भ्रम को दूर कर दिया है।
मेडिकल जर्नल The Lancet Obstetrics, Gynaecology & Women’s Health में प्रकाशित एक बड़ी research study के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान पैरासीटामॉल के उचित उपयोग और बच्चों में ऑटिज्म, ADHD या मानसिक विकास विकारों के बीच कोई direct link नहीं पाया गया। इस शोध में 43 अलग-अलग क्लिनिकल अध्ययनों का विश्लेषण किया गया, साथ ही स्वीडन में 25 लाख बच्चों के medical data का भी अध्ययन शामिल था।
शोधकर्ताओं ने sibling comparison का तरीका अपनाया — एक ही मां के उन बच्चों को तुलना में रखा गया जिनमें से एक के लिए गर्भावस्था में पैरासीटामॉल लिया गया था और दूसरे के लिए नहीं। नतीजा साफ था: दोनों समूहों में developmental risk में कोई अंतर नहीं था। पहले के अध्ययनों में दिखा संबंध वास्तविक नहीं था, बल्कि भ्रम पैदा करने वाले कारकों — जैसे मां का बुखार, संक्रमण या आनुवांशिक पृष्ठभूमि — के कारण था।
विशेषज्ञों का कहना है कि पैरासीटामॉल आज भी गर्भावस्था में सबसे safe painkiller है। यह NSAIDs या ओपिओइड्स की तुलना में कम जोखिम भरा है और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल है। फिर भी, इसे निर्देशानुसार, कम मात्रा में और केवल जब जरूरत हो, लेना चाहिए।
डर के कारण दवा न लेना कई बार ज्यादा खतरनाक हो सकता है। अगर बुखार या तीव्र दर्द को नजरअंदाज किया जाए, तो इससे preterm birth या गर्भपात का serious risk हो सकता है। इसलिए महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे केवल डॉक्टर की professional advice के बाद ही दवा लें और अपने लक्षणों को हल्के में न लें।
मैंने गर्भावस्था में बुखार आने पर पैरासीटामॉल लिया था, लेकिन बाद में autism fear ऑटिज्म के डर से काफी परेशान हुई। यह रिपोर्ट मेरे लिए राहत भरी है।
जनता में misinformation गलत जानकारी फैलना खतरनाक हो सकता है। बुखार को अनदेखा करना माँ और बच्चे दोनों के लिए health risk स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है।
रिसर्च तो अच्छी है, लेकिन क्या यह मतलब है कि हम अब बिना सोचे-समझे दवा ले सकते हैं? overuse concern अत्यधिक उपयोग की चिंता अभी भी बनी हुई है।
हमेशा डॉक्टर की सलाह के बिना कुछ न लें। यह स्टडी भी कहती है कि दवा केवल when needed जब जरूरत हो लेनी चाहिए, न कि हर छोटी बात पर।
यह जानकर अच्छा लगा कि पहले अध्ययनों में भ्रम पैदा करने वाले कारक थे। आनुवांशिकता और संक्रमण का भी बड़ा योगदान होता है।
इस तरह की खबरें आते ही public panic जनता में हड़कंप मच जाता है। मीडिया को भी जिम्मेदारी से खबर देनी चाहिए, न कि sensational headline सनसनीखेज शीर्षक से।