जब सब बेच रहे थे, तब टाटा एलेक्सी पर क्यों लगाया विदेशी निवेशकों ने दांव?
investors की एक बार फिर से भारतीय बाजार में चुपचाप लेकिन स्पष्ट पसंद दिख रही है — वह भी तब, जब technology क्षेत्र में बिकवाली का दबाव बना हुआ है। हालांकि आईटी सेक्टर के shares पर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने पिछली तिमाही में 20,658 करोड़ रुपये की बिकवाली की, लेकिन एक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) फोकस्ड कंपनी ने उनका ध्यान खींचा: टाटा ग्रुप की टाटा एलेक्सी। इस तिमाही के दौरान, जब निफ्टी आईटी इंडेक्स में 21% से ज्यादा की गिरावट आई, तब टाटा एलेक्सी में विदेशी हिस्सेदारी में 2.52% की वृद्धि हुई।
यह बढ़ोतरी कोई छोटी बात नहीं है — विदेशी निवेशकों की कुल हिस्सेदारी अब 11.08% पहुंच गई है। कंपनी के business में इंजीनियरिंग, डिजाइन और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के साथ-साथ AI, IoT, वर्चुअल रियलिटी और क्लाउड तकनीक का इस्तेमाल शामिल है। digital रीइमेजिनिंग और सिस्टम इंटीग्रेशन के जरिए टाटा एलेक्सी ग्लोबल ग्राहकों को सेवाएं देती है। यही वजह है कि निवेशक इसे भविष्य की अवसर के रूप में देख रहे हैं, भले ही पिछले छह महीने में शेयर 25% लुढ़के हों।
शेयर बाजार की दुनिया में ऐसी चालें कम नहीं हुईं, जहां कीमत गिरने पर buying बढ़ जाती है। टाटा एलेक्सी का शेयर अक्टूबर 2025 में 5586.25 रुपये से घटकर अप्रैल 2026 में 4196.50 रुपये पर पहुंच गया। 52 हफ्ते का निचला स्तर 3970 रुपये रहा, जबकि उच्चतम स्तर 6733.50 रुपये था। इस गिरावट ने निवेशकों को एक window दिया, जिसे विदेशी संस्थाएं ने छोड़ा नहीं। market में उनकी यह रणनीति छिपी हुई नहीं है — यह एक संकेत है कि आईटी सेक्टर में भी चुनिंदा कंपनियों पर विश्वास बरकरार है।
टाटा एलेक्सी के प्रति दांव केवल विदेशी निवेशकों तक सीमित नहीं है। insurance दिग्गज एलआईसी की भी इसमें 6.59% की हिस्सेदारी है, जो यह दर्शाती है कि संस्थागत भरोसा टूटा नहीं है। कंपनी ने अतीत में 1:1 के अनुपात में bonus शेयर भी बांटे हैं। 24 अप्रैल 2026 को इसकी मार्केट कैप 26,142.80 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। दीर्घकालिक दृष्टिकोण वाले निवेशक ऐसी कंपनियों को अपने पोर्टफोलियो में रखना पसंद करते हैं, जहां तकनीकी नवाचार और मजबूत फंडामेंटल्स का संयोजन हो।
अगर शेयर इतना गिरा है, तो क्या यह सच में value मूल्य है या फंसाव?
AI अभी भी बड़ा ट्रेंड है। जो कंपनियां असली नवाचार कर रही हैं, उन पर नजर रखनी चाहिए।
LIC का भी दांव है? तो शायद यह सिर्फ विदेशी मनोदशा नहीं, बल्कि भारतीय संस्थानों का भी भरोसा है।
25% गिरावट के बाद खरीदारी तो लॉजिकल लगती है। timing समय का चुनाव महत्वपूर्ण होता है।
मार्केट कैप 26,000 करोड़ है — छोटी कंपनी है, लेकिन फोकस्ड।
आईटी सेक्टर में FII बिकवाली के बीच यह एक अपवाद की तरह लगता है।
बोनस शेयर देना अच्छा संकेत है, लेकिन अब आय का रुख क्या है?
क्या AI वाकई इतना बड़ा है, या बस एक hype धूम जो फीकी पड़ जाएगी?