डील होने ही वाली थी कि..., ईरान ने बताया कहां फेल हुई पाकिस्तान में अमेरिका से बात

पाकिस्तान में हुई ऐतिहासिक वार्ता के दौरान ईरान और अमेरिका के बीच deal बस होने ही वाली थी, लेकिन अंतिम पल में बात बिगड़ गई। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि वे 'इस्लामाबाद समझौते' के करीब थे, लेकिन अमेरिका ने अचानक नई demands रख दीं और शर्तें बदल दीं। उनका आरोप है कि अमेरिका ने ईमानदार negotiation के बदले दबाव की राजनीति चुनी।

वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने कहा कि 21 घंटे से अधिक लंबी talks के बाद भी दोनों पक्ष मतभेदों की खाई पाट नहीं सके। उन्होंने कहा कि ईरान ने अमेरिका की शर्तों को स्वीकार नहीं किया। उनके मुताबिक, सबसे महत्वपूर्ण issue परमाणु कार्यक्रम था, जिस पर कोई consensus नहीं बनी।

इस नाकामी के कुछ घंटों बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकेबंदी का आदेश दे दिया। उन्होंने अपने response में कहा कि अमेरिकी नौसेना अब उन जहाजों की पहचान और रोकथाम करेगी जिन्होंने ईरान को टोल का भुगतान किया है। यह move वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा impact डाल सकता है।

पाकिस्तान ने वार्ता को आगे बढ़ाने की इच्छा जताई है। लेकिन ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती तनाव ने कूटनीतिक hope पर संकट खड़ा कर दिया है। अराघची के शब्दों में, 'अच्छाई के बदले अच्छाई मिलती है और दुश्मनी के बदले दुश्मनी।' यह वाक्य tension की गहराई को बखूबी दर्शाता है।

इस पूरी घटना में तेहरान और वाशिंगटन के बीच भरोसे की कमी साफ झलकती है। जबकि एक तरफ ईरान peace की बात करता है, तो दूसरी तरफ अमेरिका नौसैनिक pressure बढ़ा रहा है। वैश्विक समुदाय अब इस बात को लेकर चिंतित है कि क्या यह conflict आगे बढ़ सकता है।

टिप्पणियाँ 6

  • राजदूत_जी

    21 घंटे की वार्ता के बाद भी कोई agreement नहीं? यह नाटक लग रहा है।

  • गहरी_सोच

    ईरान कह रहा है कि डील करीब थी, लेकिन अमेरिका मान नहीं रहा। क्या वाकई trust टूटा या सिर्फ एक नाटक है?

  • ऊर्जा_विश्लेषक

    होर्मुज में नाकेबंदी का मतलब है तेल की कीमतों में spike । हम सभी को इसका cost भुगतना पड़ेगा।

  • नीति_प्रेमी

    अमेरिका का stance स्पष्ट है: परमाणु मुद्दे पर कोई compromise नहीं। लेकिन क्या यही तरीका शांति का है?

  • सच्चाई_चाहता

    अराघची का कहना है कि अमेरिका ने शर्तें बदल दीं। क्या कोई evidence है? या यह सिर्फ एक बहाना है?

  • सुलेमान_एच

    पाकिस्तान बीच में फंसा है। एक तरफ दबाव, दूसरी तरफ diplomacy । यह आसान नहीं है।