बंगाल चुनाव अपडेट: पश्चिम बंगाल में 'घुसपैठियों' पर अमित शाह का कड़ा हमला, कहा- कश्मीर से कन्याकुमारी तक
पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल में अब tension चरम पर है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कूचबिहार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि 'कश्मीर से कन्याकुमारी और द्वारका से गंगासागर तक, हम एक-एक infiltrator को बाहर निकालेंगे'। यह बयान राज्य के राजनीतिक दृश्य पर तीखी छाप छोड़ रहा है, खासकर तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के लिए। शाह ने आरोप लगाया कि पिछले कई दशकों में विपक्षी दलों ने आतंकवाद को बढ़ावा दिया, जबकि बीजेपी ने उसे जड़ से eliminated कर दिया है।
इस बयान के बाद तृणमूल कांग्रेस ने immediate प्रतिक्रिया दी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्रीय एजेंसियों की crackdown पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे मतदाताओं को frighten की कोशिश हो रही है। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे अपने rights के लिए खड़ी रहें, हालांकि हिंसा से दूर रहने की बात भी कही। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग और एजेंसियां निष्पक्ष नहीं रह रहीं और विपक्षी कार्यकर्ताओं को target बनाया जा रहा है।
दूसरी ओर, बीजेपी नेतृत्व आक्रामक रुख अपनाए हुए है। गृह मंत्री ने वादा किया कि अगर बीजेपी सत्ता में आई, तो राज्य में भ्रष्टाचार से लूटी गई हर एक paisa वसूली जाएगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा कि लोगों के बीच discontent स्पष्ट दिख रहा है। उनका दावा है कि जनता की expectation बेहतर प्रशासन की है और वे change चाहते हैं।
चुनाव आयोग ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। संवेदनशील इलाकों में संयुक्त दौरे के निर्देश जारी किए गए हैं ताकि मतदाताओं के confidence को मजबूत किया जा सके। वहीं, वाहनों के acquisition से आम आदमी को परिवहन में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। कई स्कूलों ने पहले से ही ऑनलाइन कक्षाओं का फैसला ले लिया है। चुनाव के दो चरण 23 और 29 अप्रैल को होने हैं, जबकि मतगणना 4 मई को होगी।
इतना pressure दबाव डालने से जनता डरती नहीं, बल्कि और ज्यादा जागरूक हो रही है।
अमित शाह का बयान तो dramatic नाटकीय लगा, लेकिन आम आदमी के लिए रोजगार और आर्थिक crisis संकट ज्यादा अहम है।
क्या targeting लक्ष्यीकरण हमेशा विपक्ष पर ही होगा? यह सिर्फ राजनीतिक हथियारबंदी है।
चुनाव आयोग को वास्तव में neutral तटस्थ रहना चाहिए। भरोसा बनाए रखना जरूरी है।
स्कूल बंद क्यों? चुनाव process प्रक्रिया में आम लोगों की जिंदगी कैसे प्रभावित होती है, इसका ख्याल कौन रखेगा?
कश्मीर से कन्याकुमारी तक का नारा तो emotional भावनात्मक है, लेकिन घुसपैठ के मुद्दे को हल करने के लिए वास्तविक policy नीति कहां है?