महिलाओं के आरक्षण अधिनियम के क्रियान्वयन में देरी न्याय में देरी के समान, बोले रिजीजू
central minister किरेन रिजीजू ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को सीधे जवाब देते हुए कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण अधिनियम के क्रियान्वयन में देरी करना लाखों महिलाओं को justice से वंचित करने जैसा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा political game नहीं, बल्कि देश की बेटियों के प्रति राष्ट्र की commitment का है।
खरगे ने हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि सरकार चुनावी फायदे के लिए महिला आरक्षण कानून को जल्दबाजी में लागू करना चाहती है। इसके जवाब में रिजीजू ने कहा कि ऐसे delay का मतलब है महिलाओं को निर्णय लेने की process से बाहर रखना, जो तीन दशकों से चले आ रहे वादे को तोड़ने जैसा है।
रिजीजू ने बताया कि संसद के बजट सत्र को बढ़ा दिया गया है और 16 से 18 अप्रैल तक एक विशेष बैठक बुलाई गई है, जहां necessary amendments पर चर्चा होगी। यह कानून, जिसे आमतौर पर महिलाओं आरक्षण अधिनियम के नाम से जाना जाता है, 2029 तक लागू होना है।
कानून के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटों का आरक्षण किया जाएगा। रिजीजू ने कहा कि मोदी सरकार ने इस वादे को reality में बदला है, लेकिन अब सीमांकन जैसे तकनीकी काम तेजी से पूरे करने होंगे।
उन्होंने एक्स पर एक statement में कहा, "महिलाओं से किए गए वादे टालमटोल की politics का हिस्सा नहीं बन सकते।" उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे rise above इस कानून के समर्थन में आएं, क्योंकि यह केवल आंकड़ों का मसला नहीं, बल्कि representation के अधिकार का मामला है।
इतने साल बाद लागू होने पर भी, implementation क्रियान्वयन में देरी क्यों? अगर सच में इरादे साफ थे तो 2023 में पारित होते ही काम शुरू हो जाना चाहिए था।
खरगे जी को शायद यह डर है कि आरक्षण से उनकी पार्टी को loss नुकसान होगा। लेकिन न्याय की बात पर राजनीति नहीं चलनी चाहिए।
क्या सीमांकन वाकई इतना जटिल है या बहाना बनाया जा रहा है? तकनीकी तर्क अक्सर राजनीतिक देरी के पीछे छिपाए जाते हैं।
33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हों तो नीतियों में real change असली बदलाव आएगा। मैं इसके लिए बहुत समय से इंतजार कर रही हूँ।
रिजीजू का pressure दबाव बनाना ठीक है, लेकिन क्या विपक्ष के साथ वाकई बातचीत हो रही है या सिर्फ बयानबाजी?
महिलाओं के लिए representation प्रतिनिधित्व न्याय का हिस्सा है। देरी का मतलब है असमानता को बरकरार रखना।