ईरान युद्ध के बीच अमेरिका का शेयर बाजार रिकॉर्ड पर, कहां से आई गुड न्यूज?
ईरान के साथ तनाव के बीच अमेरिकी शेयर market में अचानक तेजी आई है। बुधवार को एसएंडपी और नैसडैक दोनों record स्तर पर पहुंच गए, जिसमें एसएंडपी 7,022.95 पर बंद हुआ — पहली बार 7,000 के ऊपर। इसी तरह नैसडैक 24,016.02 अंक के साथ अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचा। यह उछाल ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में war tension के बीच बाजार में गिरावट आई थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि ceasefire की संभावना और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने निवेशकों के confidence को बहाल किया है। पिछले 11 सत्रों में एसएंडपी 10 बार बढ़ा और 10% से अधिक उछाल लाया। इसके market cap में 6 ट्रिलियन डॉलर की वृद्धि हुई। नैसडैक ने लगातार 11 सत्रों में वृद्धि दर्ज की, जिसमें 6% की तेजी आई।
इस बाजार रैली के पीछे एक बड़ा कारण निवेशकों का कंपनियों के आगामी profit forecast को लेकर उत्साह भी है। कई बड़ी कंपनियों के मुनाफे के आंकड़े आने वाले हैं, जिससे investor sentiment में सुधार आया है। VIX इंडेक्स, जो बाजार की अस्थिरता को दर्शाता है, पिछले 12 सत्रों में से 10 में गिरा, जो स्थिरता के संकेत देता है।
हालांकि, इस बाजार की तेजी आम उपभोक्ता की स्थिति को नहीं दर्शाती। पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी भी ऊंची हैं, जिससे लोगों का household budget डगमगा रहा है। इसका मतलब है कि बाजार का उत्साह और आम आदमी की economic pressure में अंतर है। यह अंतर एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
इस स्थिति में निवेशकों को आगे की risk से सावधान रहने की जरूरत है। युद्ध के तनाव में कोई भी बदलाव बाजार को फिर से डगमगा सकता है। फिलहाल, optimism हावी है, लेकिन यह आशावाद भू-राजनीतिक developments पर निर्भर है।
बाजार तो ऊपर जा रहा है, लेकिन पेट्रोल की कीमत ने household budget घरेलू बजट तो बर्बाद कर दिया है। यह दोहरा मापदंड कब तक चलेगा?
VIX में गिरावट सच में एक strong signal मजबूत संकेत है कि अस्थिरता कम हो रही है। लेकिन भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी मौजूद है।
क्या सीजफायर की उम्मीद पर इतना भरोसा करना सही है? एक गलत खबर और सब risk जोखिम बढ़ सकता है।
हमारे घर में शेयर बाजार के रिकॉर्ड की खुशी नहीं, पेट्रोल के दाम बढ़ने की pressure दबाव है।
नैसडैक का लगातार 11वें सत्र में उछाल आना bullish momentum तेजी की गति दिखाता है। अगर कंपनियों के रिजल्ट अच्छे आए तो और बढ़ सकता है।
कच्चे तेल में गिरावट अच्छी खबर है, लेकिन यह global supply वैश्विक आपूर्ति पर निर्भर है। अगर ईरान में फिर तनाव बढ़ा तो सब उलट सकता है।