नासा ने बनाया अंतरिक्ष अस्पताल: अब IV फ्लूइड होगा आसमान में तैयार
अब अंतरिक्ष में बीमार होने पर भी इलाज की कोई चिंता नहीं। नासा ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे space में ही IV द्रव तैयार किए जा सकते हैं। यह उपलब्धि उन लंबी अवधि के मिशनों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है जहां पृथ्वी से लाए गए चिकित्सा उत्पादों की shelf life कम पड़ जाती है। चंद्रमा या मंगल पर जाने वाले तीन साल से अधिक अवधि के मिशनों में चालक दल के स्वास्थ्य के लिए यह तकनीक जीवनरक्षक साबित हो सकती है। पहले से पैक किए गए IV फ्लूइड की समस्या केवल सीमित समय तक चलने वाली है — महज 16 महीने।
नासा के ग्लेन रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों ने इस समस्या का समाधान निकाला है। उनके द्वारा विकसित system को आईवीजीईएन मिनी नाम दिया गया है। यह सिस्टम 11 अप्रैल को नॉर्थ्रोप ग्रुम्मन के mission के जरिए अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचाया गया। यहां इसका परीक्षण किया जाएगा। अब तक IV फ्लूइड पृथ्वी पर ही बनाए जाते थे और अंतरिक्ष यान के साथ ले जाए जाते थे। अब ऐसी आवश्यकता नहीं रहेगी। यह तकनीक न केवल जगह बचाएगी बल्कि जोखिम भी कम करेगी।
आईवीजीएन मिनी कैसे काम करता है? यह स्पेस स्टेशन के drinking water को एक बड़े बैग में लेता है और फिर उसे छानकर particles और खनिज आयनों से मुक्त कर देता है। इसके बाद शुद्ध पानी को सोडियम क्लोराइड वाले बैग में मिलाया जाता है। दोनों को सही ratio में मिलाने पर रोगाणुरहित और medical उपयोग के लिए सुरक्षित IV फ्लूइड तैयार हो जाता है। यह प्रक्रिया अंतरिक्ष की कठिन परिस्थितियों में भी विश्वसनीय होनी चाहिए।
इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट मैनेजर कर्टनी श्कुरको के अनुसार, मई में इस सिस्टम का संचालन होगा। अंतरिक्ष यात्री दो दिन तक इसे चलाकर लगभग 10 लीटर तरल तैयार करेंगे। फिर इसे पृथ्वी पर वापस लाकर test की जाएगी। यह जांच तय करेगी कि क्या यह द्रव सभी safety मानकों को पूरा करता है। वर्तमान मॉडल प्रति घंटे 1.2 लीटर IV फ्लूइड बना सकता है। यह क्षमता गहरे अंतरिक्ष में होने वाली मेडिकल घटनाओं के आधार पर तय की गई है।
इस तकनीक का मतलब है कि भविष्य के अंतरिक्ष यात्री अब पृथ्वी पर निर्भर नहीं रहेंगे। वे अपने needs के अनुसार चिकित्सा उपचार कर पाएंगे। यह न केवल आपातकालीन स्थिति में मददगार होगा बल्कि लंबे मानवयुक्त missions को अधिक स्थायी बनाएगा। यह एक छोटा यंत्र है, लेकिन यह अंतरिक्ष अन्वेषण के भविष्य के लिए एक बहुत बड़ा कदम है।
अगर यह तकनीक काम करती है, तो अंतरिक्ष में चिकित्सा सुविधा का भविष्य बदल जाएगा।
क्या यह प्रणाली केवल IV फ्लूइड के लिए है या अन्य दवाओं के लिए भी विकसित की जा सकती है?
10 लीटर तरल तैयार करना अच्छी शुरुआत है। लेकिन क्या यह रोगाणुरहित स्थिति बनाए रख पाएगा?
मंगल मिशन में तीन साल लगेंगे तो यह तकनीक सचमुच जीवन बचाएगी। long missions लंबे मिशन के लिए आवश्यक है।
सोचिए, अब अंतरिक्ष में दवा भी बनेगी। यह सिर्फ विज्ञान नहीं, कल्पना है।
क्या इस सिस्टम का वजन और ऊर्जा उपयोग अंतरिक्ष यान के लिए बोझ तो नहीं बनेगा?
अगर यह काम करता है, तो अगला कदम क्या होगा? क्या हम अंतरिक्ष में टीके भी बना पाएंगे?
अंतरिक्ष में पानी को शुद्ध करना और फिर द्रव तैयार करना — यह वास्तव में इंजीनियरिंग का चमत्कार है।