CM की कुर्सी छोड़ने के बाद पहली बैठक में नीतीश कुमार करेंगे JDU विधायकों से मुलाकात, जानें क्या है मुद्दा?
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री decision लेने के बाद नीतीश कुमार 20 अप्रैल को जेडीयू विधायकों के साथ अपनी पहली बैठक करने जा रहे हैं। यह बैठक उनके राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के तीन दिन बाद हो रही है। बैठक सात सर्कुलर रोड स्थित उनके आवास पर सुबह 11:00 बजे होगी, जिसमें जेडीयू विधायक दल के नए नेता के selection सहित भविष्य की रणनीति पर चर्चा होगी।
जेडीयू के वरिष्ठ नेता श्रवण कुमार ने पुष्टि की कि बैठक में नीतीश कुमार को ही पार्टी का unanimous leader माना जाएगा। हालांकि, विधायक दल का नेता कौन होगा, इस पर अभी तक final decision नहीं हुआ है। विजय कुमार चौधरी के नाम की चर्चा सबसे आगे है, लेकिन यह निर्णय बैठक में ही लिया जाएगा।
इस बैठक में केवल नेतृत्व change ही नहीं, बल्कि मंत्रिमंडल विस्तार और पार्टी में निशांत को लेकर उठे मुद्दे पर भी चर्चा हो सकती है। नीतीश कुमार अब केवल बिहार के नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की future direction तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
बैठक के बाद जेडीयू की राष्ट्रीय परिषद और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक भी इसी महीने के अंत तक होने की संभावना है। इस बैठक में नीतीश कुमार के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की विधिवत घोषणा की जा सकती है, जो पार्टी के सांगठनिक पुनर्गठन के तहत एक बड़ा कदम होगा।
इस पूरी प्रक्रिया में नीतीश कुमार की छवि एक राज्य से परे political architect के रूप में मजबूत हो रही है। वह सीधे तौर पर सरकार के मुखिया नहीं होंगे, लेकिन पार्टी के भीतर उनका influence अब औपचारिक पद से भी आगे बढ़कर दिखाई दे रहा है।
इस बैठक में नीतीश कुमार विधायकों को केवल आश्वासन देंगे या real changes वास्तविक बदलाव की रूपरेखा देंगे? अभी तक तो सब कुछ औपचारिकता लग रहा है।
विजय चौधरी का नाम आगे है, लेकिन क्या वह वाकई leadership pressure नेतृत्व के दबाव को संभाल पाएंगे? नीतीश के साये में यह आसान नहीं होगा।
मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार सब कुछ तय कर रहे हैं। यह power shift शक्ति का स्थानांतरण नहीं, बल्कि शक्ति का पुनर्केंद्रीकरण लग रहा है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की तैयारी दिख रही है। अब देखना यह है कि क्या वे राष्ट्रीय स्तर पर political relevance राजनीतिक प्रासंगिकता बना पाएंगे।
इस्तीफे के बाद भी बैठक उनके आवास पर हो रही है। यही symbolic power प्रतीकात्मक शक्ति बताता है कि वह अभी भी सब कुछ नियंत्रित कर रहे हैं।
क्या नीतीश कुमार के बिना जेडीयू का कोई अस्तित्व है? पार्टी अब उनके personal authority व्यक्तिगत अधिकार पर चल रही है, जो लंबे समय तक टिक नहीं सकता।