महिला आरक्षण विधेयक: भाजपा की तेलंगाना इकाई ने उसके अध्यक्ष को नजरबंद किए जाने का दावा किया
तेलंगाना की राजनीति में शनिवार को एक तीव्र झटका आया जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दावा किया कि उसके राज्य अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव को मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी के आवास के सामने होने वाले कांग्रेस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन से ठीक पहले नजरबंद कर दिया गया। पार्टी का आरोप है कि यह कार्रवाई प्रदर्शन को prevent के लिए की गई थी, जो महिला आरक्षण विधेयक के विफल होने के खिलाफ था।
विधेयक, जो लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत reservation और सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव करता था, शुक्रवार को संसद में पारित नहीं हो सका। भाजपा ने इसे black day बताया और कांग्रेस पर denied women उचित प्रतिनिधित्व से वंचित करने का आरोप लगाया। रामचंद्र राव ने कहा कि इस तरह की restrictions के बावजूद पार्टी अपना अभियान जारी रखेगी।
भाजपा की तेलंगाना इकाई ने एक्स पर एक पोस्ट में पुलिस कार्रवाई की photos भी साझा कीं, जिनमें राव को पुलिसकर्मियों के बीच देखा जा सकता है। पार्टी ने इसे political suppression का उदाहरण बताया और आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज़ को silence चाहती है।
राव ने तेलंगाना की महिलाओं से अपील की कि वे कांग्रेस नेताओं को उनके खिलाफ किए गए injustice के लिए drive out । इस मांग के साथ, विधेयक के विफल होने का मुद्दा सिर्फ संवैधानिक बहस से आगे बढ़कर एक जीवंत public campaign में बदल गया है। अब सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार की यह कार्रवाई संघर्ष को शांत करेगी या उसमें further fuel डालेगी।
अगर वाकई नजरबंद किया गया है, तो यह basic right मूल अधिकार का उल्लंघन है। क्या कोई आधिकारिक आदेश है?
भाजपा को आरक्षण का इतना concern चिंता क्यों है? 2014 से लोकसभा में भी नहीं लाया था।
पुलिस ने तस्वीरें दिखाने से क्यों hesitated हिचकिचाया? ओपन डोर पॉलिटिक्स है या cover-up सफाई?
महिलाओं के लिए आरक्षण न होना दुखद है, लेकिन अब यह political tool राजनीतिक औजार बन गया है।
राव को रोकने से backfire प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। लोग और नाराज़ होंगे।
क्या महिलाएं वाकई सड़कों पर protest विरोध करने जाएंगी? या यह सब मीडिया के लिए है?