जब टीम से बाहर थे ईशान: 'रोने के बजाय रन बनाने पर ध्यान दिया'
जब कोई खिलाड़ी भारतीय टीम से बाहर होता है, तो उसके लिए रास्ता बहुत कठिन हो जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसी अंधेरे में से एक नई उम्मीद का जन्म हो सकता है? player ईशान किशन ने तो ऐसा ही किया। लगभग दो years तक राष्ट्रीय team से बाहर रहने के बावजूद, उन्होंने निराशा के बजाय focus अपने game में सुधार पर केंद्रित कर दिया। उनका मानना था कि अगर वे राष्ट्रीय टीम में वापसी चाहते हैं, तो एकमात्र तरीका है — runs बनाना। बस।
किशन ने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में score करते हुए 500 से अधिक रन बनाए और झारखंड की कप्तानी में ट्रॉफी भी जीती। यही नहीं, उन्होंने साफ कहा कि जब तक आप लगातार consistent प्रदर्शन नहीं करते, तब तक टीम में वापसी नामुमकिन है। domestic क्रिकेट के मैदानों पर उनकी लगन ने उन्हें वह ताकत दी जो आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय stage पर चमकने के लिए जरूरी थी।
उनका कहना था कि जब आप टीम से बाहर होते हैं, तो खेल के प्रति आपकी प्रतिबद्धता और बढ़ जाती है। हर match का सम्मान करने का एहसास पैदा होता है। वे चाहते थे कि उनका performance इतना मजबूत हो कि चयनकर्ता उन्हें नजरअंदाज न कर सकें। target साफ था — जितने हो सकें, उतने sixes लगाएं, बड़ा total स्कोर बनाएं।
किशन ने तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने के अनुभव को अपने विकास का key हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि इस स्थिति ने उन्हें पारी को गति देने और आखिर तक बल्लेबाजी करने का confidence दिया। उनका approach सरल रहा — चीजों को जटिल न बनाएं। effort जारी रखें। result अपने आप मिल जाएगा।
इस बीच, पूर्व खिलाड़ी मोहम्मद कैफ ने राजस्थान रॉयल्स के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की तारीफ करते हुए कहा कि वह एक generation में एक बार मिलने वाली प्रतिभा हैं। कैफ के मुताबिक, वैभव ऐसे बल्लेबाज हैं जो गली क्रिकेट की आत्मा के साथ professional मैच खेलते हैं। अगर वे fit रहे और ललक बनाए रखे, तो वे भारत के अगले 25 दशकों तक चमक सकते हैं।
ईशान किशन ने साबित कर दिया कि असफलता में ही सफलता के बीज छिपे होते हैं। struggle संघर्ष ही असली गुरु है।
घरेलू क्रिकेट में रन बनाना आसान नहीं होता। अगर आप वहां छाए रहते हैं, तो चयन तो मिलेगा ही।
क्या वैभव सच में अगला सुपरस्टार हो सकता है? लगता है कैफ ने hype हाइप ज्यादा कर दिया।
ईशान की बात सुनकर लगता है कि उन्होंने हार नहीं मानी। attitude दृष्टिकोण बदला और रास्ता खुद-ब-खुद बन गया।
अगर आपको लगता है कि बाहर होना अंत है, तो आप गलत हैं। यह सिर्फ एक नए beginning आरंभ का संकेत है।
कोई भी खिलाड़ी बिना रनों के टीम में वापसी नहीं कर सकता। किशन ने बस वही किया जो हर बल्लेबाज को करना चाहिए।
कैफ के बयान से लगता है कि वैभव के संभावना असाधारण हैं। अब देखना यह है कि वह इसे कैसे साकार करते हैं।
आजकल छक्के न लगाओ, तो सेलेक्शन भी नहीं मिलता। किशन ने सही कहा — sixes छक्के ही नए चार।