500 रन या रोना? किशन ने चुना जो खिलाड़ी बनाता है
जब कोई खिलाड़ी दो साल तक राष्ट्रीय टीम से बाहर रहता है, तो उसके दिल में निराशा की लहर आना natural है। लेकिन ईशान किशन ने उस भावना को अपने game की ताकत में बदल दिया। भारतीय टीम से बाहर होने के बाद भी, उन्होंने घरेलू circuit में अपना ध्यान केंद्रित किया, रन बनाए, और अंततः वापसी की। उनकी यह यात्रा सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक मानसिकता की कहानी है — जहां रोने के बजाय, रन बनाने पर विश्वास किया गया।
किशन का मानना है कि जब आप टीम से बाहर होते हैं, तो आपको उसकी value समझ आती है। उन्होंने कहा, 'मैं इसका रोना नहीं रो सकता या उदास नहीं हो सकता।' यह निर्णय उनके career का टर्निंग पॉइंट बना। उन्होंने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में 500 से अधिक रन बनाए, झारखंड को खिताब दिलाया, और खुद को फिर से राष्ट्रीय रडार पर लाया। उनका लक्ष्य स्पष्ट था — बस अपना सर्वश्रेष्ठ performance देना।
उन्होंने कहा कि अगर 300 रन काफी नहीं हैं, तो 400 बनाएं। अगर वो भी काफी नहीं, तो 500। क्यों? क्योंकि cricket ही हमारी रोजी-रोटी है। यह वाक्य न सिर्फ आत्मनिर्भरता की बात करता है, बल्कि खेल के प्रति commitment की भी। किशन ने तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने के अपने experience को भी अपने आत्मविश्वास का आधार बताया। उन्होंने कहा कि इस स्थिति ने उन्हें पारी को गति देने और लंबे समय तक batting करने का विश्वास दिलाया।
आईपीएल 2026 में सनराइजर्स हैदराबाद (एसआरएच) के लिए खेल रहे किशन ने जिओहॉटस्टार से कहा कि छक्के लगाना भी उनकी रणनीति का हिस्सा था। उन्होंने कहा, 'भले ही इसका मतलब किसी भी अन्य बल्लेबाज से ज्यादा छक्के लगाना हो।' यह approach उनके आक्रामक खेल को दर्शाता है। उनका फोकस सरल था — रन बनाएं, रन बनाएं, और फिर रन बनाएं। और जब आप लगातार ऐसा करते हैं, तो टीम में वापसी स्वतः हो जाती है।
ईशान किशन की वापसी सिर्फ एक आईपीएल सीज़न की कहानी नहीं है। यह उस reality के बारे में है जो खिलाड़ी अक्सर चुपचाप झेलते हैं — चयन से बाहर होना, दबाव, और फिर खुद को साबित करने की लड़ाई। उनके शब्द 'क्रिकेट ही हमारी रोजी-रोटी है' ने न सिर्फ उनकी struggle की गहराई दिखाई, बल्कि यह भी बताया कि कैसे एक profession के प्रति समर्पण, चुनौतियों को अवसर में बदल सकता है।
असली जुनून तब दिखता है जब टीम से बाहर होकर भी आप रन बनाना जारी रखते हैं। dedication समर्पण दिखाना आसान नहीं होता।
500 रन? ये तो सिर्फ शुरुआत है। अगला लक्ष्य 1000 होना चाहिए। target लक्ष्य बड़ा रखो, प्रदर्शन खुद-ब-खुद बड़ा होगा।
जब तक छक्के बोर्ड पर असर नहीं छोड़ते, कोई नहीं देखता। आजकल तो sixes छक्के ही सब कुछ हैं।
क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, जीवन का तरीका है। किशन की बात से inspiration प्रेरणा मिलती है।
लेकिन आईपीएल में प्रदर्शन अलग है, इंटरनेशनल क्रिकेट अलग। क्या वो वहाँ भी लगातार रन बना पाएंगे?
अगर 500 रन काफी नहीं हैं, तो फिर क्या काफी है? अपेक्षाएं हमेशा बढ़ती रहती हैं।
ईशान ने जो कहा, वो हर खिलाड़ी के दिल की बात है। बाहर होना दर्दनाक है, लेकिन यह मेहनत ही वापसी का रास्ता बनाती है।