अमेरिका पर लगाया दादागिरी का आरोप: ईरान के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान को दी दो-टूक चेतावनी, कहा- ट्रंप पर रत्ती भर भरोसा नहीं

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव फिर बढ़ गया है, जहां दोनों ओर से युद्धविराम समझौते के violation के आरोप लगे हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका पर कूटनीति के साथ विश्वासघात करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से ईरान की नाकाबंदी से साफ होता है कि वाशिंगटन पुराने पैटर्न को दोहरा रहा है और वास्तविक peace efforts में रुचि नहीं दिखा रहा।

पेजेशकियन ने रविवार शाम पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ हुई बातचीत में इस मुद्दे पर गहन चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से बातचीत के दौरान arbitrary behavior और बदलती नीति ने विश्वास को और कमजोर किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें न तो वाशिंगटन पर और न ही ट्रंप प्रशासन पर trust है।

ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका के provocative actions को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ बताया और चेतावनी दी कि ऐसे कदमों के क्षेत्रीय और वैश्विक stability पर भारी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। उन्होंने इजरायल और अमेरिका द्वारा किसी भी नए aggression के जवाब में ईरान के firm resolve को दोहराया।

इस बीच, अमेरिकी प्रतिनिधि सोमवार को इस्लामाबाद पहुंचने वाले हैं, लेकिन तेहरान ने अभी तक अपने प्रतिनिधिमंडल के भेजे जाने की पुष्टि नहीं की है। ईरानी सरकारी टीवी ने एक अज्ञात सूत्र के हवाले से कहा कि अमेरिका की unreasonable demands के कारण वार्ता का अगला दौर अभी संभव नहीं लगता।

पेजेशकियन ने क्षेत्रीय सहयोग के महत्व पर जोर दिया और कहा कि ईरान पड़ोसी देशों के साथ आपसी सम्मान और शांति के आधार पर संबंध बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उम्मीद जताई कि क्षेत्र से बाहर के ताकतवर तत्वों की जगह स्थानीय देश मिलकर शांति और सुरक्षा के लिए काम करेंगे।

प्रतिक्रियाएँ 8

  • अर्जुन

    अमेरिका को हर जगह अपनी influence दिखानी है, चाहे उससे विश्व शांति खतरे में क्यों न पड़े।

  • नीरज

    ट्रंप पर भरोसा न करना तो समझ आता है, लेकिन क्या ईरान की अपनी posture वास्तव में शांति के अनुकूल है?

  • सुमन

    इस तरह के आरोपों से क्षेत्र में तनाव बढ़ेगा, और आम लोगों की जीवन यापन की लागत और बढ़ेगी।

  • काव्या

    वार्ता टूटने से पहले दोनों पक्षों को diplomatic channels से बात करनी चाहिए।

  • राघव

    अमेरिका ने बार-बार अपनी foreign policy से यही साबित किया है कि वह केवल अपने हितों में विश्वास रखता है।

  • शिवांगी

    ईरान के साथ बातचीत में पाकिस्तान की भूमिका दिलचस्प है। क्या वह वाकई neutral ground का काम कर पाएगा?

  • विकास

    संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन करना गंभीर बात है। क्या कोई international response आएगी?

  • मेघना

    हर बार नए conflict की आहट सुनाई देती है, लेकिन कोई स्थायी solution क्यों नहीं मिलता?

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

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