अमेरिका-ईरान वार्ता आज: ट्रंप ने किया ऐलान पर ईरानी मीडिया ने किया खंडन, पाकिस्तान मेजबानी को तैयार
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद आज अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच एक बार फिर diplomatic role निभाने के लिए तैयार है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने announcement है कि आज शाम से वार्ता शुरू होगी, लेकिन ईरानी मीडिया इसे denial कर रहा है। मेहर न्यूज़ के अनुसार, ईरान इस दौर की बातचीत में delegation नहीं भेज रहा, क्योंकि वाशिंगटन की 'अत्यधिक मांगें', 'अवास्तविक अपेक्षाएं' और 'बार-बार के विरोधाभास' बातचीत के रास्ते में बाधा बन रहे हैं।
इस बीच, अमेरिका के पांच लड़ाकू विमान रविवार को ही इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं, और पांच और आज तक पहुंचने की expectation है। अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान की जटिल सुरक्षा स्थिति के मद्देनजर security arrangement को अत्यधिक गंभीरता से लिया जा रहा है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बजाय ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। ट्रंप ने एबीसी न्यूज को बताया कि यह security concern के चलते है।
ईरान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ वार्ता का leadership कर सकते हैं। विदेश मंत्री अब्बास अराघची समेत अन्य नेता भी शामिल हो सकते हैं। इस बीच, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने रविवार को स्पष्ट किया कि ईरान युद्ध को escalate नहीं चाहता। उन्होंने कहा कि संघर्ष लंबे समय तक चले, तो किसी के लिए भी वह beneficial नहीं होगा।
उन्होंने dialogue और समझदारी पर जोर दिया और कहा कि तनाव के बजाय समन्वय से tension कम किया जा सकता है। उन्होंने फरवरी से जारी इज़राइल-अमेरिका के क्षेत्रीय हस्तक्षेप के संदर्भ में चिंता व्यक्त की। इस बीच, इस्लामाबाद में airport और नूर खान एयरबेस के आसपास के क्षेत्रों को रविवार आधी रात से पूरी तरह सील कर दिया गया है।
पुलिस ने रेड जोन में सभी यातायात पर रोक लगा दी है और नागरिकों को alternative routes का उपयोग करने की सलाह दी है। रावलपिंडी में ड्रोन, कबूतर उड़ाने और हवाई फायरिंग पर भी पूर्ण ban लगा दिया गया है। पुलिस अधिकारी छतों पर तैनात हैं, और विशेष सुरक्षा उपायों के तहत high alert घोषित किया गया है। अब दुनिया की निगाहें इस बात पर हैं कि क्या यह वार्ता वास्तव में शुरू होगी या फिर राजनयिक deadlock जारी रहेगा।
अगर ईरान वार्ता में नहीं आ रहा, तो अमेरिका का इतना बड़ा security setup सुरक्षा इंतजाम क्यों? ये सिर्फ दिखावा तो नहीं?
ट्रंप हर बार ऐलान करते हैं, लेकिन real action असली काम कम दिखता है। क्या ये सिर्फ घरेलू राजनीति के लिए है?
कबूतर उड़ाने पर प्रतिबंध? ये तनाव का स्तर कितना गहरा है। लोगों की दिनचर्या पर क्या असर पड़ेगा।
ईरान के राष्ट्रपति का peace statement शांति बयान अच्छा लगा, लेकिन क्या इसे वाशिंगटन गंभीरता से लेगा?
पाकिस्तान बार-बार मध्यस्थ बन रहा है। क्या ये उसकी strategic position रणनीतिक स्थिति को मजबूत करेगा?
जब तक दोनों तरफ से genuine dialogue वास्तविक संवाद नहीं होगा, तनाव कम नहीं होगा।