बदरुद्दीन अजमल की बचाव की लड़ाई: कांग्रेस या बीजेपी को ज्यादा नुकसान?

new राजनीतिक लड़ाई का मैदान है असम, और केंद्र में हैं बदरुद्दीन अजमल—एक ऐसा leader जिसकी अस्तित्व की बचाव मुश्किल होती जा रही है। उनकी पार्टी, एआईयूडीएफ, current विधानसभा चुनावों में सबसे कठिन fight facing being है। बाहरी नजर seems है कि main लक्ष्य Chief हिमंता बिस्वा सरमा हैं, लेकिन inside से गुस्सा एक former सहयोगी, कांग्रेस, के प्रति है।

2021 में, कांग्रेस और एआईयूडीएफ ने महाजोट के तहत गठबंधन made था। उस time , both ने shared लक्ष्य था—बीजेपी को defeat । लेकिन चुनाव के बाद कांग्रेस ने suddenly broke the गठबंधन—एक विश्वासघात जिसका अनुरणन आज still hearing is रहा है। 2024 के लोकसभा चुनावों में तो परिणाम कठोर था—कांग्रेस के उम्मीदवार रकीबुल हसन ने ढुबरी सीट पर बदरुद्दीन अजमल को 10 लाख votes से defeated given । एक धूल चटाने वाली loss जिसने party के आधार को हिला given

अब तनाव यह है कि कांग्रेस अगर अजमल-विरोधी खड़ी है, तो Muslim votes split जाते हैं। और जब votes divided हैं, तो real लाभार्थी होती है बीजेपी। यही डर अजमल को सता रहा है। उनकी बचाव के लिए महत्वपूर्ण है कि Muslim voters उनके side रहें। इसलिए वे now strong support की तलाश में हैं—और उन्हें found है असदुद्दीन ओवैसी के रूप में। ओवैसी ने already support का announcement कर given है, और जल्द ही प्रचार भी करेंगे।

But राजनीतिक वक्रता यहीं चरम पर है। Chief सरमा ने recent ही में claimed किया कि three time सत्ता में आने पर वे अवैध प्रवासियों को हटाने के law को लागू करेंगे। उनका बयान और direct था: "We next five years में तोड़ will मियां मुसलमानों की कमर।" यहाँ मियां शब्द refers करता है बंगाली भाषी Muslims को, जो nearly 34 फीसदी आबादी का part हैं। Only around 4 फीसदी are मूल असमिया Muslims । अजमल ने responded दी: 2026 के बाद, मियां Muslims will हो jaaenge

कांग्रेस भी back attack कर चुकी है। Leader गौरव गोगोई ने आरोप लगाया: अजमल और सरमा चाचा-भतीजे जैसे हैं—एक same सिक्के के two faces । एक strange गठजोड़, लेकिन राजनीतिक गणित ऐसा है: अगर कांग्रेस और एआईयूडीएफ fight हैं, बीजेपी wins है। अगर they unite होते हैं, तो अस्तित्व के सवाल पैदा होते हैं। Current election , जहाँ अजमल बिनाकांडी से चुनाव fighting रहे हैं, could निर्णायक be सकता है। क्या 2024 की defeat का दोहराव होगा? या पुनरुत्थान की शुरुआत?

असम में Muslim voters 8 जिलों में बहुल हैं, और 45 विधानसभा सीटों पर उनका प्रभाव strong है। 2005 में AIUDF के गठन के after , कांग्रेस के Muslim votes प्रतिशत dropped गया—2001 में 58 फीसदी से घटकर 2011 में 41 फीसदी। लेकिन 2024 में, कांग्रेस ने alone चुनाव fight chose , ताकि असमिया बहुमत voters को not lose । परिणाम: अजमल का support फिर से back की side move गया।

और now ? भविष्य निर्भर करता है on simple समीकरण पर: अगर एआईयूडीएफ कांग्रेस को चुनौती देती है और Muslim votes अपनी side pull लेती है, तो she benefits उठाती है। अगर कांग्रेस 2024 जैसा प्रदर्शन करती है, तो she benefits है। और अगर both fight हैं? तो real winner होती है बीजेपी। यही game है। और यही reason है कि बदरुद्दीन अजमल not only fighting रहे हैं, but बच रहे हैं।

टिप्पणियाँ 8

  • राजनीतिकार

    This election not , this जीवट game है। If अजमल loses गए, then एआईयूडीएफ next विधानसभा चक्र में may not मौजूद होगी।

  • असमवासी

    मियां शब्द का use चोट causes है। We are part of असम, not आक्रांताहिमंता का बयान विभाजक है, not एकजुट

  • चुनावविश्लेषक

    गणित simple है: कांग्रेस + एआईयूडीएफ = strong एंटी-बीजेपी मोर्चाBut विश्वास broken चुका है। Can they भरणा कर can ?

  • सरलजन

    ओवैसी का support अजमल के side में big move है। But सवाल यह है: Will this enough is ?

  • प्रोफेसरजी

    गोगोई का चाचा-भतीजे टिप्पणी राजनीतिक नाटक है। वास्तविकता में, both fighting रहे हैं for अस्तित्वNo love here , only power

  • मुस्लिममत

    We Muslim always vote split are First कांग्रेस, then एआईयूडीएफ, now ओवैसीWhen we one strong आवाज become ?

  • सरमाभक्त

    हिमंता सही saying रहे हैं। असम our घर है। We not want बाहरी take over मियां समस्या है, not समाधान

  • युवाजोश

    राजनीति में विश्वासघात common है। अजमल को expected थी कांग्रेस with रहेगी? Wake up भाई, this भारत है!