क्या यह मांग बेतुकी है? राहुल गांधी ने नोएडा के मजदूरों के सवाल को उठाया
नोएडा की सड़कों पर मजदूरों का protest अब सिर्फ एक स्थानीय मुद्दा नहीं रहा। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे राष्ट्रीय आर्थिक नीति की विफलता का प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा कि जब मजदूर basic needs पूरी करने के लिए कर्ज में डूब जाएं, तो सवाल उठना लाजिमी है। उन्होंने पूछा—क्या यह मांग बेतुकी है?—एक ऐसा सवाल जो सीधे सरकारी policies के दिल पर वार करता है।
राहुल ने बताया कि नोएडा में एक मजदूर की मासिक आय सिर्फ 12,000 रुपये है, जबकि किराया 4,000 से लेकर 7,000 रुपये तक जाता है। इस बीच, inflation उसकी तनख्वाह को निगल जाती है। एक साल में मजदूरी में सिर्फ 300 रुपये की बढ़ोतरी होती है, लेकिन मकान मालिक किराया 500 रुपये बढ़ा देते हैं। यह अंतर न सिर्फ economic pressure पैदा करता है, बल्कि उसे कर्ज के चक्र में धकेलता है।
उन्होंने नए श्रम कोडों की तीखी आलोचना की, जिनके तहत काम के घंटे बढ़ाकर 12 प्रतिदिन कर दिए गए हैं। राहुल का तर्क है कि जब मजदूर इतने लंबे समय तक काम करते हुए भी अपने बच्चों की स्कूल फीस जुटाने के लिए कर्ज ले, तो उसकी मांग सिर्फ जायज नहीं, बल्कि जरूरी है। उन्होंने 20,000 रुपये के minimum wage की मांग को rights की लड़ाई बताया।
महिला मजदूरों के हवाले से उन्होंने जो बात उठाई, वह दर्द की तस्वीर खींचती है—gas prices बढ़ रहे हैं, लेकिन तनख्वाह नहीं। एक सिलेंडर के लिए शायद 5,000 रुपये खर्च करने पड़ें, लेकिन आमदनी वही रहती है। राहुल ने कहा कि वैश्विक संकट का बोझ उद्योगपतियों पर नहीं, बल्कि दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ रहा है।
अंत में, उन्होंने सवाल किया कि जब मजदूर अपना justice मांगता है, तो उसे दबाव और जुल्म क्यों मिलता है? उन्होंने कहा कि यह सरकार की नीति ने मजदूर को देश की रीढ़ की जगह एक burden बना दिया है। विकास के नाम पर जो कुछ हो रहा है, वह सच में विकास है या शोषण?
20 हजार न्यूनतम वेतन? अगर inflation महंगाई इतनी तेज है, तो यह demand मांग बेतुकी कैसे हो सकती है?
लेकिन ये तो सिर्फ नोएडा की बात नहीं, पूरे देश में दिहाड़ी मजदूर ऐसे ही जी रहे हैं।
महीने की salary तनख्वाह 12 हजार, किराया 7 हजार? बचता क्या है खाने-पीने के लिए?
अरे, जब आप 12 घंटे काम करो और फिर भी basic needs बुनियादी जरूरतें पूरी न हों, तो protest विरोध करना ही एकमात्र रास्ता है।
क्या government सरकार सच में नहीं जानती कि inflation महंगाई कितनी तेजी से बढ़ रही है?
राहुल गांधी ने सही कहा—मजदूर को rights अधिकार नहीं, burden बोझ बना दिया गया है।