क्या आपका खाना बढ़ा रहा है कैंसर का खतरा? वैज्ञानिकों की नई शोध ने चौंकाया
प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के एक नए अध्ययन ने स्तन cancer के खतरे को लेकर चिंता बढ़ा दी है। शोध में पता चला है कि high-fat diet कैंसर की प्रगति को तेज कर सकता है, खासकर triple-negative स्तन कैंसर के मामले में, जो इलाज के लिहाज से सबसे जटिल माना जाता है। यह निष्कर्ष उन मरीजों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जिनमें ट्यूमर पहले से मौजूद है।
शोधकर्ताओं ने लैब में 3D ट्यूमर विकसित कर उसे मानव प्लाज्मा जैसे वातावरण में रखकर वास्तविक शारीरिक परिस्थितियों की नकल की। चार प्रकार के आहार—high insulin , उच्च ग्लूकोज, उच्च कीटोन और उच्च वसा—का परीक्षण किया गया। सबसे चौंकाने वाला नतीजा यह रहा कि high fat के संपर्क में आने पर कैंसर कोशिकाओं का बढ़ना तेज और आक्रामक हो गया।
प्रोफेसर नेल्सन के अनुसार, टीम ऐसे आहार की तलाश में थी जो कैंसर की प्रगति को slow down , लेकिन उन्हें उल्टा परिणाम मिला। ट्यूमर वृद्धि में वसा युक्त आहार ने सबसे ज्यादा योगदान दिखाया। यह जानकारी भविष्य में चिकित्सकों को treatment plan बनाते समय मरीज के आहार को ध्यान में रखने में मदद कर सकती है।
विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि इसका अर्थ यह नहीं है कि वसा खाने से सीधे कैंसर होता है। वसा शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्व है। लेकिन जिन महिलाओं में पहले से ट्यूमर है, उनके लिए लंबे समय तक high-fat intake खतरनाक साबित हो सकता है। यह अध्ययन आहार और कैंसर के बीच के संबंध को समझने में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारत में हर साल लगभग दो लाख महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले सामने आते हैं, जिनमें से लगभग 30% triple-negative प्रकार के होते हैं। ऐसे में यह शोध न केवल चिकित्सा दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि public awareness के लिहाज से भी एक संदेश छोड़ता है। संतुलित आहार और वसा के सेवन में सावधानी अब सिर्फ वजन के लिए नहीं, बल्कि गंभीर बीमारियों के risk को कम करने के लिए भी जरूरी है।
ये सुनकर डर लग रहा है। मैं हमेशा घी और मक्खन को स्वाभाविक मानती थी, लेकिन अब high-fat intake अधिक वसा के सेवन पर नजर रखनी पड़ेगी।
अध्ययन तो लैब में हुआ, लेकिन क्या यह real-life असल जिंदगी में भी ऐसा ही होता होगा? डॉक्टरों को इस पर और शोध करना चाहिए।
ट्रिपल-नेगेटिव कैंसर के बारे में तो बहुत कम जानकारी मिलती है। इस खोज से public awareness जन जागरूकता बढ़ेगी, ये अच्छी बात है।
शाकाहारी तो फिर भी कम वसा वाला भोजन खाते हैं। क्या यह risk खतरा मांसाहारियों में ज्यादा है?
एक शोध को तुरंत आहार निर्देश नहीं मानना चाहिए। लेकिन यह finding खोज रोग के प्रबंधन में आहार के महत्व को रेखांकित करती है।
हर बार कोई नया warning चेतावनी आ जाती है। क्या अब हम कुछ भी खा सकते हैं बिना डर के?