पेट की आम समस्या से शुरू हुई थी, डॉक्टर ने सुनाया मौत का फरमान: 67 साल के शख्स की लड़ाई पैंक्रियाटिक कैंसर के खिलाफ

67 वर्षीय लॉरेंस फॉक्स के लिए जुलाई 2024 का महीना जीवन बदलने वाला साबित हुआ। उन्हें पेट दर्द और digestive issues होने लगी, जिसे वे सामान्य अपच या पुरानी बीमारी समझ बैठे। खाना ठीक से न पचना, बार-बार ढीले दस्त आना, और वजन कम होना—इन सभी symptoms को उन्होंने घरेलू उपायों से ठीक करने की कोशिश की। वे drank रहे इनो, सोडा और कभी-कभी दवाएं, लेकिन कोई आराम नहीं मिला।

शुरुआत में डॉक्टरों ने भी इसे infection मानकर एंटीबायोटिक्स दे दीं। अगस्त में एंडोस्कोपी के बाद कुछ नहीं मिला, लेकिन नवंबर के सीटी स्कैन ने सच्चाई उजागर कर दी—75 मिलीमीटर का tumor । दिसंबर में डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया: यह स्टेज फोर पैंक्रियाटिक कैंसर है। ट्यूमर इतना खतरनाक स्थान पर था कि surgery संभव नहीं था। उनके पास जीने के महज 9 महीने बचे थे।

पैंक्रियाटिक कैंसर दुनिया के सबसे घातक कैंसरों में से एक है। इसके early signs इतने सामान्य होते हैं कि ज्यादातर लोग उन पर ध्यान नहीं देते। अपच, पेट दर्द, वजन घटना, या bowel movement में बदलाव—ये सब छोटी समस्याएं लग सकती हैं, लेकिन लगातार होने पर चेतावनी के संकेत हैं। एनएचएस के आंकड़ों के अनुसार, इस बीमारी में 5 साल से अधिक जीने की chance 10 प्रतिशत से भी कम है।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। लॉरेंस ने 12 राउंड chemotherapy से गुजरने का फैसला किया। हर सत्र लगभग 9 घंटे का था, लेकिन इलाज ने चमत्कार किया—ट्यूमर सिकुड़कर महज 15 मिलीमीटर रह गया और कैंसर का स्टेज कम हो गया। अब वे गोल्फ खेल रहे हैं, पिलाटेस और स्विमिंग की योजना बना रहे हैं। उनका बेटा जेमी ने ब्राइटन मैराथन में भाग लेकर उनके लिए फंड जुटाया और cancer awareness को बढ़ावा दिया।

लॉरेंस का संदेश सीधा है: early detection जान बचा सकता है। उन्होंने कहा, “अगर पाचन संबंधी समस्या लगातार हो, खाना ठीक से न पचे, या वजन अचानक घटे, तो तुरंत डॉक्टर से consult लें।” वे चाहते हैं कि लोग सामान्य लगने वाले warning signs को न अनदेखा करें। उनकी कहानी न सिर्फ उम्मीद की कहानी है, बल्कि एक जीवन-बचाने वाली नसीहत भी।

प्रतिक्रियाएँ 6

  • अर्जुन_जी

    इतने आम लक्षणों को कौन गंभीरता से लेता है? मैं भी हफ्ते में दो-तीन बार इनो पी लेता हूं। अब लगता है regular issues होने पर डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

  • माया_देवी

    कैंसर जैसी बीमारी में treatment cost भी तो बहुत होता है। सरकार को ऐसे मामलों में ज्यादा सपोर्ट देनी चाहिए।

  • राज_सिंह

    तनाव में इंसान अपनी सेहत को छोटा समझने लगता है। लॉरेंस की मां का निधन भी पीछे का कारण है। mental health भी शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ा है।

  • नीतू_चौधरी

    क्या सच में इतनी जल्दी tumor size 75 से 15 मिमी हो सकता है? कीमो इतना असरदार होता है?

  • डॉ_वर्मा

    बिल्कुल सही। पैंक्रियाटिक कैंसर में जल्दी पता चलना बहुत मुश्किल होता है। early diagnosis ही अंतर बना सकता है।

  • प्रिया_एम

    उनके बेटे ने मैराथन दौड़कर फंड जुटाया—यह बहुत भावुक कर देने वाला है। family support ऐसे संकट में बहुत मायने रखता है।

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

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