शांति वार्ता के बीच पाकिस्तान की गुप्त सऊदी डील: क्या ईरान को धोखा दिया जा रहा है?
पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच peace talks की मेजबानी कर रहा है, लेकिन इसी बीच उसने सऊदी अरब को fighter jets भेजकर एक गुप्त रक्षा deal पूरी की है। यह विरोधाभासी कदम तब आया है जब पूरे क्षेत्र में regional war की आशंका बढ़ रही है। क्या पाकिस्तान वास्तव में शांति का मार्गदर्शक बनना चाहता है, या यह सिर्फ एक रणनीतिक posture है?
NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने शनिवार को सऊदी अरब के ईस्टर्न प्रोविंस में स्थित किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पर fighter jets और सहायक विमानों की टुकड़ी तैनात की। यह कदम 2025 में हस्ताक्षरित एक secret pact के तहत लिया गया, जिसमें पाकिस्तान को सऊदी अरब पर किसी भी attack की स्थिति में सैन्य assistance भेजने की बाध्यता है।
हालांकि यह समझौता पूरी तरह one-sided है — पाकिस्तान को सहायता भेजनी है, लेकिन सऊदी अरब की ओर से उसकी security के लिए कोई बराबरी की शर्त नहीं है। यह defense cooperation 1982 के गोपनीय समझौते से शुरू हुआ और 2025 में SMDA के तहत अंतिम रूप लिया। पाकिस्तान की obligation सऊदी संप्रभुता और राष्ट्रीय interests की रक्षा करने की है।
इस बीच, पाकिस्तान ने हाल ही में इस्लामाबाद में अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों के बीच युद्धविराम वार्ता की मेजबानी की, लेकिन बातचीत failed हो गई। 21 अप्रैल को दो हफ्ते के युद्धविराम की समयसीमा खत्म हो रही है। पाकिस्तान के साथ ईरान के relations अच्छे हैं, और उसकी आबादी में बड़ी संख्या में शिया समुदाय है, जो ईरान के प्रति sympathy रखता है।
अगर सऊदी अरब पर ईरान से कोई threat बढ़ता है, तो पाकिस्तान को सैन्य रूप से pulled in — यानी वह खुद युद्ध में हो सकता है, जबकि वह शांति का दूत बनने की कोशिश कर रहा है। यह economic pressure भी है: सऊदी अरब पाकिस्तान के स्टेट बैंक में 5 अरब डॉलर से अधिक जमा रखता है, जो समय-समय पर rolled over होता रहता है।
एक तरफ peace broker शांति का दूत, दूसरी तरफ गुप्त military deployment सैन्य तैनाती... यह नीति कहां तक टिकेगी?
पाकिस्तान की foreign policy विदेश नीति हमेशा से दोहरी रही है। आर्थिक सहायता के बदले सैन्य support समर्थन देना अब नई बात नहीं।
SMDA समझौता one-sided एकतरफा है, लेकिन क्या यह पाकिस्तान के लिए strategic risk रणनीतिक जोखिम नहीं है? ईरान को यह कैसे लगेगा?
क्या सऊदी अरब के funds धन के बिना पाकिस्तान अपनी economy अर्थव्यवस्था चला पाएगा? वास्तविकता जांच जरूरी है।
क्षेत्र में war युद्ध बढ़ा, तो refugee crisis शरणार्थी संकट भी आ सकता है। जन सुरक्षा कौन सुनेगा?
अमेरिका और ईरान के बीच diplomatic failure कूटनीतिक विफलता के बाद अब regional stability क्षेत्रीय स्थिरता के आसार कम हैं।