भारत झुकेगा नहीं, अमेरिकी छूट खत्म होने के बाद भी जारी रखेगा रूसी तेल और एलपीजी आयात
अमेरिका ने रूसी तेल पर दी गई 30 दिन की relief खत्म कर दी है, लेकिन भारत का stance साफ है: वह न झुकेगा और न ही रूस से तेल व एलपीजी के import में कोई change करेगा। अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका का यह decision उसकी आंतरिक policy है, और भारत की ऊर्जा strategy पर इसका कोई direct impact नहीं होगा।
मार्च में, ईरान जंग के बीच तेल आपूर्ति में disruptions की आशंका के चलते अमेरिका ने रूसी तेल पर अस्थायी छूट दी थी, लेकिन अब वह वापस ले ली गई है। फिर भी, भारतीय refiners रूस से तेल और एलपीजी के नए deals पर बातचीत जारी रखे हुए हैं। एक सूत्र ने कहा कि ongoing efforts के तहत रूस से raw oil और एलपीजी की आपूर्ति जारी रहेगी, खासकर उन संस्थाओं से जिन पर प्रतिबंध नहीं है।
हालांकि, रूस से एलपीजी का supply अभी सीमित है। एक अन्य सूत्र ने बताया कि अब तक जितना एलपीजी आयात के लिए तय हुआ है, वह अभी भारत प्राप्त नहीं किया है। इस बीच, अमेरिका भारत के लिए एलपीजी का primary supplier बना रहने की संभावना है। कनाडा और अंगोला से भी अतिरिक्त गैस के लिए बातचीत चल रही है।
ऊर्जा आयात के pattern में भी बड़ा बदलाव आया है। फिनलैंड के थिंक टैंक CREA के डेटा के अनुसार, फरवरी 2026 से पहले पश्चिम एशिया भारत के कुल तेल आयात का लगभग 60% था, जो अब घटकर 30% रह गया है। वहीं, मार्च में रूसी कच्चे तेल के आयात में month-on-month दोगुनी growth हुई।
CREA के अनुसार, मार्च में चीन के बाद भारत रूसी fossil fuels का दूसरा सबसे बड़ा आयातक बन गया, जिसने 5.8 बिलियन यूरो के रूसी हाइड्रोकार्बन का आयात किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल का कहना है कि भारत विभिन्न sources से तेल खरीद रहा है, और यह नीति व्यावसायिक लाभ व आपूर्ति श्रृंखला विविधता पर आधारित है।
अमेरिका के दबाव में आने से बेहतर है कम कीमत पर तेल लेना। यह economic sense आर्थिक रूप से समझदारी है।
लेकिन क्या रूस से तेल खरीदने से हमारी वैश्विक reputation प्रतिष्ठा पर असर नहीं पड़ेगा? यह diplomatic risk राजनयिक जोखिम तो नहीं?
हमारी जरूरत है सस्ती ऊर्जा। बाकी सब political pressure राजनीतिक दबाव है।
अमेरिका को लगता है दुनिया उसकी बात मानेगी। भारत ने साफ कर दिया कि हम sovereign संप्रभु देश हैं।
क्या रूस से एलपीजी की आपूर्ति में बढ़ोतरी से खाना पकाने की गैस की कीमत कम होगी?
इतना डेटा तो अच्छा है, लेकिन क्या CREA के figures आंकड़े पूरी तरह भरोसेमंद हैं?