44 डिग्री की चितकबरी धूप: मध्यप्रदेश में गर्मी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड
मध्यप्रदेश अब heat के चपेट में आ चुका है, जैसे सूरज ने अपने तपते तीर तान दिए हों। अप्रैल के पहले हफ्ते से ही प्रदेश के कोने-कोने में तापमान 44 डिग्री तक पहुँच गया है, और मौसम विज्ञान केंद्र की डॉ. दिव्या सुरेंद्रन के अनुसार यह सिर्फ शुरुआत है। नर्मदापुरम और भोपाल जैसे शहर cities में लोग सांस लेने को तरस रहे हैं। यह कोई साधारण गर्मी नहीं, बल्कि एक संकट है जो मई के पहले दो हफ्तों में और भयावह हो सकता है।
डॉ. सुरेंद्रन के अनुसार, तापमान में अगले दिनों में 1 से 2 डिग्री की rise हो सकती है — एक छोटी-सी संख्या, लेकिन जिसका असर जानलेवा हो सकता है। लोगों को लू और निर्जलीकरण से बचने के लिए सतर्क रहने की ज़रूरत है। तेज हवाओं की रफ्तार, जो 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुँच सकती है, गर्मी को और intense बनाती है। यह गर्मी सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ाती है।
थोड़ी राहत की उम्मीद तभी है जब weather में बदलाव आए — गरज के साथ बारिश की संभावना है, जो थोड़े समय के लिए गर्मी पर relief ला सकती है। लेकिन यह ठंडक झूठी सुकून हो सकती है, क्योंकि बारिश के बाद तापमान फिर से आसमान छूने के लिए तैयार है। मौसम विभाग की चेतावनी साफ है: इस warning को हल्के में न लें।
इस बीच, भोपाल ने अपने चार साल पुराने रात के तापमान के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है — अब रात में भी record 27.8 डिग्री तापमान दर्ज हुआ। यह इंगित करता है कि शरीर को ठंडक पाने का मौका भी नहीं मिल रहा। जबलपुर, रीवा, सतना और भोपाल जैसे क्षेत्र अगले कुछ हफ्तों में सबसे अधिक affected होंगे। गर्मी अब एक seasonal घटना नहीं, बल्कि एक बार-बार आने वाली चुनौती बनती जा रही है।
मौसम विज्ञानी आम लोगों से अपील करते हैं कि वे दोपहर के समय धूप में न निकलें, पर्याप्त पानी पिएं और ढीले, हल्के कपड़े पहनें। ये measures साधारण लगते हैं, लेकिन जान बचा सकते हैं। गर्मी अब बच्चों और बुजुर्गों के लिए खास तौर पर dangerous हो रही है। मौसम बदल रहा है, और अब हमें भी बदलना होगा।
44 डिग्री में तो दोपहर में बाहर निकलना आत्महत्या जैसा है। क्या सरकार कोई ठंडे स्थानों की व्यवस्था नहीं कर सकती?
हमारे यहाँ तो पिछले तीन दिनों से बिजली भी गायब है। पंखे बेकार हैं, और पानी का दबाव भी कम। क्या officials अधिकारी इस पर कोई कार्रवाई करेंगे?
अप्रैल में ही ये हालत... मई आते-आते तो जमीन भी पिघल जाएगी। ये जलवायु बदलाव सचमुच डरावना हो रहा है।
हर घर में एक थर्मामीटर और पानी की बोतल होनी चाहिए। बच्चों को भी इसके बारे में education शिक्षा देनी चाहिए।
मैं रोज 10 किमी बाइक चलाता हूँ। अब तो सुबह 5 बजे निकलना पड़ रहा है। धूप जैसे चाकू से काट रही हो।
हमारे समय में गर्मी थी, लेकिन इतनी तीव्र नहीं। ये नई generation पीढ़ी सहन नहीं कर पा रही।
स्कूलों में छुट्टी क्यों नहीं? बच्चे बस में भीषण गर्मी में भाग रहे हैं।
इस बार जल संकट भी साथ आया है। गर्मी में पानी की कमी सबसे बड़ी समस्या है।