नेताओं के कमरे में महिलाएं: एक बयान जो बन गया तूफान
leaders के rooms में जाने के बिना महिलाएं politics नहीं कर सकतीं — यह दावा करने वाले सांसद पप्पू यादव अब खुद एक नई controversy के केंद्र में हैं। उनका यह बयान, जिसमें उन्होंने दावा किया कि 90 प्रतिशत महिलाएं बिना ऐसे rooms में प्रवेश के राजनीति में सफल नहीं हो सकतीं, सोशल मीडिया पर वायरल होते ही political तूफान ला दिया। नीतीश कुमार की पार्टी जदयू की एक leader ने पटना पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें यादव के खिलाफ महिलाओं के प्रति offensive टिप्पणी का आरोप लगाया गया है।
बिहार की राजधानी पटना में जांच अभी चल रही है, लेकिन सिटी एसपी का कहना है कि शिकायत के आधार पर investigation की जा रही है और केवल तभी एफआईआर दर्ज की जाएगी। इस बीच, बिहार राज्य women आयोग ने भी सांसद को नोटिस भेज दिया है। आयोग की अध्यक्ष अप्सरा ने 21 अप्रैल को जारी नोटिस में यादव से तीन दिन के भीतर explanation मांगा है। गंभीरता इतनी है कि आयोग ने यहां तक सवाल उठाया कि क्यों न उनकी membership रद्द करने की सिफारिश लोकसभा अध्यक्ष को भेजी जाए।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी यादव के statement की निंदा की है। लेकिन इस सबके बीच, पप्पू यादव अपने दावे पर कायम हैं। उनका कहना है कि वह केवल इतना बताना चाह रहे थे कि कई महिलाएं अपने mentors द्वारा शोषित होती हैं। उनका यह claim पहले भी सुर्खियों में रहा है — पिछले संसद सत्र में, उन्होंने कहा था कि महिलाओं के साथ यौन शोषण में politicians सबसे आगे हैं, फिर बाबा और अफसर आते हैं।
यादव का यह भी दावा रहा है कि गूगल पर सबसे ज्यादा porn नेता ही देखते हैं। यह बयान भी social मीडिया पर तेजी से फैला। उनके विरोधियों का कहना है कि वह महिलाओं के साथ शोषण के मुद्दे को उठाते हैं, लेकिन उनकी भाषा और ढंग खुद महिलाओं के प्रति अपमानजनक है। वहीं, कुछ समर्थकों का मानना है कि उन्होंने सच कहा, भले ही वह कितना भी कड़वा क्यों न लगे। एक ऐसे दौर में, जब महिला empowerment के नारे गूंज रहे हैं, यादव का बयान एक झटके की तरह है — क्या यह झटका जागरूकता का है या राजनीतिक बहानेबाजी का, यह समय बताएगा।
क्या नेताओं के rooms कमरे की बात सच नहीं है? कई महिलाएं इसका शिकार तो होती ही हैं।
महिलाओं के प्रति इस तरह की comment टिप्पणी कभी नहीं की जानी चाहिए। यह अपमानजनक है।
अगर ये बात सच है तो भी इसे इस तरह कहने का क्या need जरूरत थी? तरीका गलत था।
महिलाओं को नेताओं के rooms कमरे में जाने के बजाय, खुद का रास्ता बनाने का अधिकार है।
लोग सच सुनने से डरते हैं। पप्पू यादव ने truth सच कहा, चाहे वह कितना भी कड़वा क्यों न हो।
एक तरफ महिला सशक्तिकरण, दूसरी तरफ 'नेताओं के कमरे' — यही है हमारी reality वास्तविकता।
इस तरह के बयान को वायरल करके मीडिया खुद सनसनी फैला रहा है।
सांसद के खिलाफ एफआईआर होनी चाहिए, अगर यह complaint शिकायत गंभीर है।