जब आधी आबादी की उम्मीदें राजनीति के भंवर में फंस जाएं

कटिहार की सियासी हवा में आज महिला सशक्तिकरण के मुद्दे की गर्माहट है। भाजपा नेत्री भाजपा की बबीता कुमारी कश्यप ने legislative bill के पारित न होने को लोकतंत्र के लिए unfortunate बताया है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक कानूनी प्रस्ताव नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी की hope पर पानी फिरने जैसा है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में आरक्षण देने की बात हो रही है, लेकिन राजनीतिक अड़चनों के कारण यह अटका हुआ है।

बबीता कश्यप ने पटना में आयोजित protest में भाग लेने के बाद स्पष्ट किया कि इस महत्वपूर्ण कदम में विपक्षी दलों का नकारात्मक रवैया बाधा बन रहा है। उन्होंने कांग्रेस और अन्य दलों पर आरोप लगाया कि वे अपने संकीर्ण स्वार्थों के लिए एक ऐतिहासिक पहल को रोक रहे हैं। उनके अनुसार, अगर राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी गई होती, तो यह law बन चुका होता।

उन्होंने सवाल उठाया कि जहां पंचायतों में महिला आरक्षण सफलतापूर्वक लागू हो चुका है, तो संसद में इसके लिए इतनी अड़चनें क्यों? उनका मानना है कि कुछ दल महिला सशक्तिकरण के प्रति serious नहीं हैं और केवल दिखावटी राजनीति कर रहे हैं। यह विधेयक न सिर्फ न्याय का मुद्दा है, बल्कि समाज के संतुलन की बात भी है।

इस बहस ने राजनीतिक माहौल को तीखा बना दिया है। सत्तारूढ़ दल इसे progressive step बता रहे हैं, जबकि विपक्ष की role पर सवाल उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा न सिर्फ संसद में, बल्कि जनता के बीच भी गहराई से छाएगा। महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण को लेकर सियासत अब एक नई दिशा में बह रही है।

प्रतिक्रियाएँ 8

  • सत्यवती_१९७२

    महिलाओं को आरक्षण देना सिर्फ न्याय की बात नहीं, सामाजिक न्याय की आवश्यकता है।

  • राजनीति_दीदी

    क्या विपक्ष सच में इसके खिलाफ है, या बस सरकार को घेरने की रणनीति चला रहा है?

  • बबलू_पंडित

    अगर पंचायत में हो सकता है, तो विधानसभा में क्यों नहीं? यह तर्क तो बिल्कुल logical है।

  • नीरज_बिहारी

    सिर्फ बहाने बनाने से कुछ नहीं होगा। progress चाहिए, नाटक नहीं।

  • माँ_की_बेटी

    मेरी माँ ने कभी वोट नहीं डाला। मैं चाहती हूँ कि मेरी बेटी एक दिन विधायक बने।

  • सिंधु_वास

    राजनीति में लड़कियों के लिए जगह बनाना inclusive लोकतंत्र की पहली शर्त है।

  • गपशप_चाचा

    सबके पास बोलने का अधिकार है, लेकिन काम करने की जिम्मेदारी किसकी?

  • संदीप_मिश्रा

    इस विधेयक पर इतनी देरी क्यों? क्या राजनीति में महिलाएँ सच में अवसर की हकदार हैं?

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

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