महिला आरक्षण और परिसीमन बिल: पारित होगा विधेयक या विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ेगा संसद का सत्र?
सरकार को confidence है कि वह संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक को सफलतापूर्वक पारित करा लेगी, भले ही विपक्ष के protests की आशंका बनी हुई है। नारी शक्ति वंदन संशोधन एवं परिसीमन विधेयक दोनों constitutional amendments हैं, जिन्हें पारित करने के लिए दो-तिहाई majority की आवश्यकता है।
लोकसभा में कुल 540 सदस्य हैं, अतः इन विधेयकों को पारित करने के लिए सरकार को कम से कम 360 सदस्यों का support चाहिए। विपक्षी गठबंधन, जिसमें कांग्रेस के नेतृत्व वाले दल शामिल हैं, परिसीमन विधेयक को लेकर सरकार की intent पर सवाल उठा रहा है, लेकिन महिला आरक्षण पर किसी भी दल ने खुलकर विरोध नहीं किया है। राजनीतिक रूप से ऐसा करना किसी भी पार्टी के लिए risky भरा माना जाता है।
गृह मंत्री अमित शाह ने पहले ही कई छोटे दलों के नेताओं के साथ विस्तृत talks की है, जिसमें महिला आरक्षण के साथ-साथ परिसीमन के मुद्दों पर भी assurance दिए गए। सरकार का तर्क है कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाएगा, जिससे किसी भी राज्य को disadvantage नहीं पहुंचेगा। सभी क्षेत्रों — उत्तर, दक्षिण और पूर्व — की सीटें proportionally बढ़ेंगी।
इस पारदर्शिता से सत्तापक्ष को उम्मीद है कि विपक्ष के पास परिसीमन विधेयक का विरोध करने का कोई solid कारण नहीं बचेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गुरुवार को चर्चा में भाग लेने की संभावना है, जबकि शुक्रवार को अमित शाह विधेयकों पर response दे सकते हैं। माना जा रहा है कि महिला आरक्षण विधेयक full बहुमत के साथ पारित होना लगभग तय है।
यह विधेयक संसद में कई दशकों से लंबित रहा और अब इसके पारित होने की expectation बहुत तेजी से बढ़ रही है। विपक्षी दलों के objection के बावजूद, सरकार का विश्वास है कि यह ऐतिहासिक moment देश के लिए न्यायपूर्ण और जनहित में होगा।
360 का आंकड़ा मुश्किल नहीं है, लेकिन अगर छोटे दल भी साथ आएं तो pressure दबाव कम होगा।
महिला आरक्षण पर विरोध करना political suicide राजनीतिक आत्महत्या है — कोई दल ऐसा जोखिम नहीं लेगा।
2011 की जनगणना पर आधारित परिसीमन से हमारे region क्षेत्र को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए।
सब कुछ ठीक लग रहा है, लेकिन trust भरोसा तब होगा जब सदन में आंकड़े साफ होंगे।
संवैधानिक संशोधन के लिए process प्रक्रिया सही होनी चाहिए, भले ही लक्ष्य सही हो।
प्रधानमंत्री का भाग लेना signal संकेत है कि यह सिर्फ नीति नहीं, बल्कि प्राथमिकता है।