लोकसभा में आज परिसीमन पर 18 घंटे की मैराथन बहस, क्या हैं तीन बिल जिनसे बदल जाएगी विधायिका की तस्वीर
16 अप्रैल 2026 को भारतीय संसद का विशेष सत्र एक historic day के रूप में दर्ज होगा। इस दिन लोकसभा में तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे, जो महिला आरक्षण के implementation और लोकसभा की संरचना में बदलाव लाएंगे। इनका उद्देश्य 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को ऑपरेशनल करना है, जिससे 2029 तक लोकसभा में women's representation बढ़ेगी। बिलों के जरिए 543 सीटें increased to 850 तक की जाएंगी, जिसमें 815 राज्यों के लिए और 35 केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी।
पहला बिल संविधान के अनुच्छेद 81 में amendment करके सीटों की ऊपरी सीमा तय करेगा। दूसरा, परिसीमन विधेयक 2026, 2011 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की boundaries फिर से तय करेगा। तीसरा बिल केंद्र शासित प्रदेशों जैसे दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में भी महिला आरक्षण लागू करने का रास्ता साफ करेगा। इन तीनों के मिलने से 33 प्रतिशत आरक्षण लागू हो पाएगा, जिससे 2029 के चुनाव में 270 से अधिक महिला सांसद आ सकती हैं।
हालांकि, इन बिलों पर तीव्र political tension भी देखने को मिल रहा है। विपक्ष आरोप लगा रहा है कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन के जरिए power grab करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि बिल का उद्देश्य ओबीसी, दलित और आदिवासी समुदायों के share को कम करना है। दक्षिणी राज्यों की पार्टियां, जैसे डीएमके, ने चेतावनी दी है कि अगर उनके राज्यों को कम सीटें मिलीं, तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध करेंगे।
परिसीमन आयोग को बिल के तहत यह अधिकार दिया जाएगा कि वह latest census के आधार पर सीटों का बंटवारा करे। अभी तक 1971 की जनगणना के आधार पर समायोजन रोका गया था, ताकि जनसंख्या नियंत्रण के प्रयास न डगमगाएं। अब इसे unlocked करने से उन राज्यों को नुकसान पहुंच सकता है, जिन्होंने जनसंख्या पर नियंत्रण रखा है। इसलिए विपक्ष का तर्क है कि यह federal structure के साथ खिलवाड़ है।
लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति ने इन बिलों पर चर्चा के लिए 18 घंटे का समय निर्धारित किया है, जो शुक्रवार तक भी जा सकता है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पहले दो बिल पेश करेंगे, जबकि गृह मंत्री अमित शाह तीसरे बिल को पेश करेंगे। लोकसभा में पास होने के बाद ये बिल राज्यसभा में जाएंगे। अगर दोनों सदनों से पास हो जाते हैं, तो महिला आरक्षण के लिए रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा। इससे न केवल लोकसभा बल्कि राज्य विधानसभाओं में भी सीटों की संख्या बढ़ेगी, जिससे राजनीतिक भूगोल बदल जाएगा।
ये बिल सिर्फ महिला आरक्षण नहीं, बल्कि political map राजनीतिक नक्शे को फिर से बनाने की कोशिश है। दक्षिण और उत्तर-पूर्व के लिए यह बड़ा risk जोखिम है।
महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण तो बहुत देर से आया है, लेकिन इसे honest implementation ईमानदार क्रियान्वयन के बिना कोई फायदा नहीं।
अगर हमारे राज्यों को कम सीटें मिलीं, तो यह सिर्फ representation प्रतिनिधित्व का सवाल नहीं, बल्कि federal rights संघीय अधिकारों का सवाल होगा।
मैं समझता हूं कि जनगणना के आंकड़ों को unlock अनलॉक करना जरूरी है, लेकिन क्या यह उन राज्यों के खिलाफ नहीं जाएगा जिन्होंने जनसंख्या पर नियंत्रण रखा?
क्या सरकार सच में महिला सशक्तिकरण चाहती है, या बस एक political cover राजनीतिक आवरण के तहत सत्ता को मजबूत कर रही है?
इतनी बड़ी policy change नीतिगत बदलाव होने जा रही है, लेकिन आम आदमी को इसके impact प्रभाव के बारे में कम जानकारी है।