गांवों के लिए 3 साल: डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ाने की मांग
गांव के एक छोटे से स्वास्थ्य केंद्र में एक गर्भवती महिला के सामने खाली कुर्सी और बंद दवा कक्ष हैं। डॉक्टर कहीं नहीं। hospital के बाहर लटका बोर्ड कहता है – 'चिकित्सक उपलब्ध नहीं'। यह कोई अकेला मामला नहीं, बल्कि ग्रामीण राजस्थान की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर है। अब इस संकट को देखते हुए अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ (अरिसदा) ने एक आवाज उठाई है – retirement की उम्र 62 से बढ़ाकर 65 कर दी जाए।
अरिसदा के अध्यक्ष डॉ. अजय चौधरी का कहना है कि government को तुरंत फैसला लेना चाहिए। experience डॉक्टरों के जाने से नए चिकित्सकों के आने तक का अंतराल बहुत खतरनाक हो सकता है। treatment के लिए लोगों को शहरों की ओर भागना पड़ता है, जहां delay से जान भी जा सकती है। यह सिर्फ एक नौकरशाही का सवाल नहीं, बल्कि जान-माल का सवाल है।
डॉक्टरों की shortage ने गांवों में स्वास्थ्य ढांचे को कमजोर कर दिया है। कई primary स्वास्थ्य केंद्रों में एंबुलेंस और दवाइयां मौजूद हैं, लेकिन बिना डॉक्टर के वे बेकार हैं। patient बिना इलाज के लौटते हैं। pregnant महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
संघ का तर्क है कि तीन साल की बढ़ी हुई सेवानिवृत्ति उम्र से relief मिलेगी। बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी और नए भर्ती होने वाले डॉक्टरों के लिए समय मिलेगा। लेकिन अगर सरकार ने अभी निर्णय नहीं लिया, तो warning है कि ग्रामीण स्वास्थ्य प्रणाली पूरी तरह चरमरा सकती है। यह कोई अतिशयोक्ति नहीं, बल्कि एक आने वाली आपदा का prediction है।
सही मांग है। experienced अनुभवी डॉक्टरों के जाने से गांवों में सेवाएं और खराब हो रही हैं।
हमारे यहां तो पिछले छह महीने से डॉक्टर नहीं है। अब क्या होगा? frustration निराशा बढ़ रही है।
क्या बढ़ी उम्र सच में समस्या का समाधान है? भर्ती पर ध्यान देना जरूरी है।
जब बच्चे बीमार होते हैं और डॉक्टर नहीं मिलता, तो helpless बेबसी महसूस होती है।
मैं 62 की उम्र में अभी पूरी तरह सक्रिय हूं। क्यों नहीं काम करूं?
इस समस्या के लिए दूरचिकित्सा जैसे विकल्प भी तो हैं।