तेल की राह से वापसी: वेनेजुएला का आर्थिक चमत्कार?
कुछ साल पहले तक वेनेजुएला की economy चरमरा चुकी थी। महंगाई इतनी बढ़ गई थी कि लोग bread या दूध खरीदने के लिए नोटों से भरे बैग लेकर जाते थे। आज, वही देश तेल के जरिए दुनिया के बाजारों में वापसी कर रहा है। अप्रैल में उसका crude oil निर्यात 14% बढ़कर 12.3 लाख बैरल प्रति दिन हो गया — पिछले सात साल में सबसे तेज गति। यह उछाल वेनेजुएला के लिए एक आश्चर्यजनक मोड़ है, खासकर जब 2018 के बाद से अमेरिका ने उसके तेल क्षेत्र पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे थे।
इस बदलाव की शुरुआत जनवरी में हुई, जब अमेरिका ने निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाने की कोशिश की। इस घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के बीच एक बड़ा supply समझौता हुआ। इसके बाद अमेरिकी लाइसेंसों ने प्रतिबंधों में ढील दी, जिससे बड़ी ट्रेडिंग कंपनियों के लिए वेनेजुएला का तेल खरीदना फिर से possible हो गया। कंपनियां जैसे विटोल और ट्राफिगुरा अब तेल खरीदकर उत्तरी अमेरिका, यूरोप और एशिया की रिफाइनरियों को deliver रही हैं।
अप्रैल में 66 टैंकर वेनेजुएला के बंदरगाहों से रवाना हुए — मार्च के 61 से ज्यादा। यह निर्यात अब उस स्तर पर है जो 2018 के बाद पहली बार देखने को मिला है। अमेरिका अब तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है, जिसने पिछले महीने 4,45,000 बैरल प्रति दिन आयात किया — मार्च के 3,63,000 bpd से काफी आगे। भारत ने भी अपनी खरीद बढ़ाई, जो 3,74,000 bpd तक पहुंच गई। यूरोप को होने वाला निर्यात 1,65,000 bpd हो गया। यह सब दिखाता है कि वेनेजुएला ने अपने ग्राहक आधार को बढ़ाने में कामयाबी हासिल की है।
निर्यात के 56% हिस्से पर ट्रेडिंग कंपनियों का नियंत्रण है, जिन्होंने 6,91,000 बैरल प्रति दिन की आपूर्ति सुनिश्चित की। शेवरॉन का योगदान 3,08,000 bpd रहा — कुल निर्यात का 25%। भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने PDVSA से सीधे एक बड़ा cargo लिया और अभी भी कम से कम तीन सुपरटैंकर लोड होने के लिए कतार में हैं — जो भविष्य में और आयात का संकेत देता है। यह सब वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था के लिए आय के नए रास्ते खोल रहा है।
हालांकि, अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट अभी भी सतर्क है। वह वेनेजुएला की तेल आय पर कंट्रोल्ड अकाउंट्स के जरिए monitor रख रहा है। इसके बावजूद, वेनेजुएला ने अप्रैल में 3,60,000 टन तेल के बाय-प्रोडक्ट्स और पेट्रोकेमिकल्स भी निर्यात किए। यह मार्च के 3,82,000 टन से कम है, लेकिन यह दिखाता है कि देश न केवल कच्चे तेल पर निर्भर है, बल्कि विविधता लाने की कोशिश भी कर रहा है। एक दुर्भाग्यपूर्ण अतीत से उबरते वेनेजुएला की यह ऊर्जा यात्रा अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन इसमें वास्तविक गति दिख रही है।
अमेरिका के साथ यह समझौता वाकई बड़ा मोड़ है। अब वेनेजुएला के लिए market बाजार खुल गए हैं।
12.3 लाख बैरल प्रति दिन? यह तो अभी भी 2014 के स्तर से बहुत कम है। क्या यह स्थायी हो पाएगा?
रिलायंस का वेनेजुएला से सीधा कार्गो लेना दिखाता है कि भारत ऊर्जा सुरक्षा के लिए नई रणनीति बना रहा है।
कैरेबियन स्टोरेज सेंटर्स पर 1.87 लाख bpd भेजना बताता है कि यह सिर्फ बिक्री नहीं, बल्कि strategy रणनीति है।
पहले मुद्रास्फीति ने सब कुछ चुरा लिया था। अब देखना यह है कि क्या यह आय आम आदमी तक पहुंचेगी।
यूरोप की खरीद में बढ़ोतरी से लगता है कि वेनेजुएला फिर से global वैश्विक ऊर्जा नक्शे पर आ रहा है।
जब लोग ब्रेड के लिए नोटों के थैले लेकर जाते थे, उसके बाद यह उछाल चमत्कार जैसा लगता है।
अमेरिका निगरानी रख रहा है। इसका मतलब है कि यह स्वतंत्रता नहीं, बल्कि शर्तों पर आधारित है।