पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था: 5 दिन के बाद क्या?
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था एक ऐसे संकट में है जैसे कोई ship बिना ईंधन के समुद्र में डूबने के कगार पर हो। देश के पास अब केवल oil 5-7 दिन के लिए बचा है, और पेट्रोल का एक दिन का भी reserve नहीं बचा। यह तब है जब डीजल का stock 26-28 दिन और एलपीजी का करीब 15 दिन के लिए है। ऊर्जा मंत्री अली परवेज मलिक ने एक टीवी कार्यक्रम में चेतावनी जारी की कि अगर तेल की आपूर्ति नहीं बहाल हुई, तो आर्थिक गतिविधियां ठप हो सकती हैं।
इस संकट की जड़ मध्य पूर्व में बढ़ते tension में है, जहां ईरान और अमेरिका के बीच टकराव ने होर्मुज जलडमरूमार्ग को लगभग block कर दिया है। दुनिया का 20% कच्चा तेल यहीं से गुजरता है, और इस रास्ते के बंद होने से पाकिस्तान जैसे देश, जो खाड़ा देशों पर depend हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। वैश्विक market में अस्थिरता के बीच दुबई क्रूड के दाम अब 170 डॉलर तक पहुंचने की आशंका है।
अब तो सरकार ने एयरलाइंस के लिए आधिकारिक warning (NOTAM) जारी कर दी है — यह दुनिया का पहला ऐसा मामला है। ईंधन की बचत के लिए सरकार कोविड जैसे lockdown की तैयारी कर रही है। स्कूल-कॉलेज बंद कर ऑनलाइन education शुरू करने, कार्यालयों में वर्क फ्रॉम होम, और निजी वाहनों के उपयोग पर restriction जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
यह संकट पाकिस्तान की पहले से डगमगाती अर्थव्यवस्था पर एक और blow है। महंगाई पहले ही आम आदमी की जेब पर दबाव डाल रही है। अब जहाजों का बीमा 30,000 डॉलर से बढ़कर 4 लाख डॉलर तक पहुंच गया है, जिसका खर्च सीधे उपभोक्ताओं पर आएगा। परिवहन महंगा होगा, तो सब्जियां, दवाइयां और ration भी महंगे होंगे।
इस विपत्ति के बीच पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि भी डगमगा रही है। जो देश इस्लामी और पश्चिमी दुनिया के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने का दावा करता है, वह अब अपनी बुनियादी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में struggle कर रहा है। विदेशी मुद्रा के कम भंडार और आईएमएफ के strict नियमों के बीच, यह संकट अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित हो सकता है।
अगर तेल नहीं मिला तो आम आदमी क्या करेगा? सरकार को तुरंत solution समाधान ढूंढना चाहिए।
आईएमएफ के शर्तों के तहत चलना इतना मुश्किल हो गया है कि अब तो जीना भी महंगा पड़ रहा है।
हमें अपनी energy ऊर्जा नीति पर दोबारा विचार करना चाहिए। खाड़ा पर इतनी निर्भरता खतरनाक है।
लॉकडाउन वापस आ रहा है? क्या अब हमें फिर से घरों में कैद रहना पड़ेगा?
ऊर्जा संकट ने पाकिस्तान की वास्तविकता बेरहमी से उजागर कर दी है।
हम तो पहले से ही बिजली के बिना जी रहे हैं, अब तेल भी खत्म हो गया तो क्या अंधेरे में survive जीना सीखेंगे?
इतना बड़ा संकट है और सरकार अभी तक गंभीर नहीं लग रही।
मध्यस्थ बनने की बजाय, पहले अपने घर के अंदर के crisis संकट से निपटो।