2029 चुनाव में महिला आरक्षण लागू होने की संभावना बनी रहेगी, यूं ही नहीं जारी हुआ 'नारी शक्ति एक्ट' वाला नोटिफिकेशन
2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण के लागू होने की संभावना अब भी जीवित है, भले ही संविधान का 131वां संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका। नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 के जरिए महिलाओं को संसद में 33 प्रतिशत reservation देने का प्रावधान पहले से ही law बन चुका है। इसका मतलब है कि सरकार decision कर सकती है कि जनगणना और परिसीमन पूरा होने के बाद इसे लागू करना है।
विधेयक के असफल होने का मतलब यह नहीं है कि आरक्षण का रास्ता बंद हो गया है। government के पास अभी भी दो मुख्य विकल्प हैं। पहला, जनगणना और परिसीमन के बाद 2029 तक आरक्षण लागू करना। दूसरा, मौजूदा 543 सीटों के आधार पर ही आरक्षण शुरू करना, बिना सीटों की संख्या बढ़ाए। यह दृष्टिकोण राजनीतिक रूप से कम pressure वाला हो सकता है।
सरकार ने विधेयक पर मतदान से एक दिन पहले ही आधी रात को नारी शक्ति एक्ट के तहत notification जारी कर दिया था, जो इस बात का संकेत है कि वह इस मुद्दे पर public support बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है। यह कदम सिर्फ औपचारिकता नहीं था, बल्कि एक political signal था कि महिला आरक्षण को लागू करने का प्रयास जारी रहेगा।
हालांकि, चुनौतियां भी हैं। सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जो राजनीतिक रूप से मुश्किल है। लेकिन यदि केवल परिसीमन किया जाए, तो विभिन्न दलों के बीच consensus बनने की संभावना है। इसलिए, आगे का रास्ता तकनीकी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर negotiation पर निर्भर करेगा।
इस बीच, परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े दो अन्य विधेयक अभी लंबित हैं। इन्हें मौजूदा लोकसभा के कार्यकाल में कभी भी पेश किया जा सकता है। यह दर्शाता है कि सरकार ने अभी भी नीतिगत अवसर को बंद नहीं होने दिया है। आगे की implementation प्रक्रिया न केवल कानूनी, बल्कि राजनीतिक strategy पर भी निर्भर करेगी।
अगर परिसीमन बिना सीट बढ़ाए होता है, तो आरक्षण लागू करने में cost लागत भी कम आएगी। यह बजट के हिसाब से भी समझदारी होगी।
सरकार ने नोटिफिकेशन आधी रात को जारी किया — यह कोई संयोग नहीं है। यह एक tactical move रणनीतिक कदम था ताकि विरोध को समय न मिले।
हम महिलाएं इस आरक्षण के लिए लंबे समय से wait इंतजार कर रही हैं। उम्मीद है कि 2029 तक यह सिर्फ वादा न रह जाए।
देश के कुछ हिस्सों में महिलाओं की संसदीय भागीदारी आज भी बहुत कम है। आरक्षण के बिना representation प्रतिनिधित्व बराबर नहीं हो सकता।
मीडिया इसे 'फॉर्मेलिटी' कह रहा है, लेकिन नोटिफिकेशन जारी करना legal process कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, न कि सिर्फ प्रचार।
अगर संसद में फिर से बहस होती है, तो क्या विपक्ष block अवरोध पैदा करेगा? यही असली challenge चुनौती है।