संसद में बिल गिरने के बाद अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'मोदी सरकार की उल्टी गिनती शुरू'
लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के असफल होने के साथ ही परिसीमन बिल भी vote की रद्दी में चला गया। इस असफलता के बाद दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अहंकार की defeat हुई है और मोदी सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है।
संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए two-third majority की आवश्यकता होती है, जो सरकार को प्राप्त नहीं हुआ। चूंकि यह बिल गिर गया, इसलिए केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल और परिसीमन बिल पर भी मतदान नहीं हो सका। इसका मतलब है कि भारत का political landscape अगले चुनाव तक वैसा का वैसा रहेगा।
केजरीवाल ने ट्वीट कर घोषणा की, "मोदी जी के अहंकार की हार हुई। मोदी सरकार की उल्टी गिनती शुरू।" आम आदमी पार्टी के अन्य नेता भी इस मुद्दे पर सरकार पर pressure बनाने में लगे हैं।
आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि बीजेपी राज्यों को तोड़कर उत्तर और दक्षिण के बीच conflict पैदा करना चाहती थी। उनके अनुसार, यह बिल वास्तव में महिला आरक्षण के लिए नहीं, बल्कि सीटों की संख्या बढ़ाकर बीजेपी के political advantage के लिए लाया गया था।
इस विफलता ने सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। विपक्ष का कहना है कि यह सरकार की अतिक्रमण की सीमा को दर्शाता है, जबकि सत्तारूढ़ दल की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
अब तो सरकार को public trust जन भरोसा खोने का डर सच में आ गया है। ये उल्टी गिनती बस शुरुआत है।
महिला आरक्षण का मुद्दा तो जनहित में था, लेकिन इसे political game राजनीतिक खेल बना दिया गया। काश कि सब इसे गंभीरता से लेते।
मोदी जी के अहंकार की हार? अच्छा मजाक है। असली हार तो उसकी होगी जो governance शासन में विफल रहेगा।
क्या अब विपक्ष वाकई में unity एकता दिखा पाएगा? या फिर ये सब सिर्फ एक ट्वीटर वॉर है?
परिसीमन न होने से दक्षिण भारत की चिंता तो समझ आती है, लेकिन क्या उत्तर के राज्यों को भी नुकसान होगा? जनसांख्यिकीय बदलाव को अनदेखा करना खतरनाक है।
संसद में बहस के बजाय shouting चिल्लाना अब नियम बन गया है। क्या कोई बिल कभी शांति से पारित होगा?